SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 696
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ उत्तरपुराणम् विश्वक्षितीश-समस्त राजा ६२।१२२ विश्वणार्थिन्-भोजनाभिलाषी शर्म-सुख ६११ शर्मपरम्परा-सुखकी सशति ४८.५५ शलाटु-कच्चा फल ४८1११७ शल्य-वीणाका एक दोष ७०।२७१ शंकर-शान्ति या सुखके करने बाले ७०११ शाकटिक-गाड़ी चलानेवाले विषमत-सांप ७१।२१४ विषय-देश ४८.३ विष्टपनालिका-लोकनाड़ी अपवा असनाड़ी। यह लोकनाड़ी लोकके बीच में स्थित है। चौदहराजू ऊँची और एक राजू चौड़ी है ५१३१७ विष्णुविधेय-कृष्णके सेवक ७०।४८२ विष्वणन-भोजन ७६।१३६ वीतघृण-निर्दय ६७।३०९ वीध्र-शुक्ल । प्रशस्ति ।३३ वृत्रहा-इन्द्र ७६।३० । वेजित-कम्पित ७६।३९९ वैमुख्य-प्रतिकूलता ७११८ वैयात्य-धृष्टता ७०।२६५ वैराग्यकाष्ठा-वैराग्यकी उच्चसीमा ६१२९० चैश्रवणोपम-कुबेरके समान ७०।१४७ ग्यसु-मृत ७१०१५ [श] शकटाकार-गाड़ीका आकार रखनेवाली कंसकी पूर्वभवकी एक विद्या ७०१४१९ शचीपति-इन्द्र ७४।३५७ शब्दशास्त्र-व्याकरण ५४०२१ शम्फली-दूती ६३।१२३ शयु-अजगर ५९॥३१३ शरद-वर्ष ६९।८० शरब्याप्ति-गोंदरा नामक तृणका फैलाव । पक्षमें बाणोंका विस्तार ६९।२१ शराव-मिट्टीका सकोरा ७४ ३४२ शरीर संन्यास-शरीर त्याग, समाधिमरण ६९.१२ शाखामृग-वानर ७६१४४१ शिक्षक-उपाध्याय, परमेष्ठी ४८।४४ शीतक-ढीला, कार्य करने में मन्थर ६८।४३७ शुक्लपक्षान्त-पूर्णिमा ६१५ शुक्ललेश्यावय-द्रव्य और भाव दोनों प्रकारको शुक्ल लेश्याओं से सहित ६१।११ शुविशुक्ल-ज्येष्ठशुक्ल ६१३५२ शुल्क-टेक्स ७६।४१० शुल्कमीलुक-टेक्ससे हरनेवाले ७०११२८ शोकाशनि-शोकरूपी वज्र ४८।६२ शौण्डकारिणी-कलारन ७०1३४७ श्वानी-नरकगति ७५२१६ समा-वर्ष ६१९३ समाधान-वित्तकी एकाग्रता अथवा समाधि ४८।१३ समासमनिवृति-जिसका मोक्ष शोघ्र होने वाला है ४९।३ सम्प्रधारण-प्रतिज्ञा ४८१७० सम्फली-दुती ५४।२१२ सम्मिन्नश्रोतृ-एक निमित्तज्ञानी ६२८३ सम्भूय-मिलकर ६२.११२ सम्भ्रान्त-घबड़ाया हुआ ६२।११५ सम्मद-हर्ष ५१५२२ सम्मुखीन-दर्पण ४९।१ सम्मुखीनतलोपम-दर्पणतमके समान ६६।३० संयुग-युद्ध ५७१७६ संरम्मसम्भृत-क्रोषसे परिपूर्ण ६३।१६१ सपशय्या-नागशय्या । कृष्णका एक रत्न ७०।४४१ साशन-मयूर ६७।२९ सर्वगीर्वाण-सब देव ६३६४१० संवेगजनक-भय उत्पन्न करने वाला ७०।२ सहसाधन-सेनासहित ७५१६४७ सहस्रसमायुष्क-हजारवर्षकी बायु वाला ७१।१२३ सहस्राक्ष-इन्द्र ५०१२३ संहत-मिले हुप ६४।३ साधन-सेना ६१८० सामज-हाथी ५९।१९७ सामय-रोगसहित ५८९ सामवायिकता-सहायता ६८४१ सार्व-सब हितकारी ५३।११ सावध-पाप सहित ५१।१० सावष्टम्म-अभिमानपूर्ण ६२।१७६ । . सिद्धार्थ-कृतकृत्य ४८।१३६ सिंहवाहिनी-एक विद्या ६२।११२ सिंहविष्टर-सिंहासन ६३३१४९ षटोपवास-दो दिनका उपवास ६४॥३९ षोडशसमा-सोलह वर्ष ७५.६९० [स] सजानि-स्त्रीसहित ६श२२ सञ्चितायाः-पुष्यका संचय करनेवाले ४९।५७ सपर्या-पूजा ६७४ सप्तच्छद-सप्तपर्ण ६११४२ सप्रेक्ष-विचारवान् ७०।२१२ समवर्त-यमराज ६११७८ समवर्ती-यमराज ६८४६०६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002728
Book TitleUttara Purana
Original Sutra AuthorGunbhadrasuri
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2000
Total Pages738
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Mythology
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy