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________________ ६२५ २७९९ ] मवमभवि कण्हजरसंघविग्गहु ६३ [२७९३] वसुदेवेणं विहियं सयंवरे रोहिणीए जे तइया । एक्कंग-मेत्तएण वि तं तुम्भे किं न संभरह ॥ [२७९४] तम्हा नेमि-जिणिंदो नमंसणिज्जो सुरासुराणं पि । __मोत्तूण पणामं तम्मि विक्कमो कस्स वि न जुत्तो ॥ [२७९५] इय हंसगेण भणिए मगहवई भणइ - हंत जइ एवं । तो नेमि-जिणाइ-जुयं पि तं वलं मज्झ तणयस्स ॥ [२७९६] कालस्स भएण पलाइऊण पच्छिम-दिसाए किं लुक्कं । किं वा सोरिय-महुराइ-मंडलो तेहिं परिचत्तो ॥ [२७९७] तयणु हंसगु भणइ - नणु देव नय-मग्गु इहु एरिसउ सु-पुरिसाहं न य कायरत्तणु । जं न फलइ विक्कमु वि दव्व-खेत्त-कालाइयहं विणु ॥ तदिण-जायउ केसरि वि करिहिं कुंभ न दलेइ । न य अइ-वालउ विसहरु वि कं-पि कह वि डंकेइ ॥ [२७९८] __अवि य केसरि करइ संकोवु मेसो वि अवक्कमइ हणिउ-कामु गुरुयर-पहाविण । इय गरुय-विचिट्ठियहं एरिसाहं किं पहु वियारिण ॥ कालस्स वि तहं सम्मुहहं धावंतहं किं वित्तु । इय परिभावउ नाहु इग- ठाणि धरेविणु चित्तु ॥ [२७९९] एम्व हंसग-सचिव पडिवक्खु उववन्निरि पुणु पुणु वि जाव कुविवि निवु किं-पि पभणइ । ता डिभग-नामु निव- पुरउ सचिवु एरिसु पयंपइ ॥ पहु न पसिद्धिण हवइ जउ किंतु सुकय-जोगेण । इय मुणिऊण महा-यसहं किमियर-भणियव्वेण ॥ २७९९. १. एंव. २. क. उवववनिरि. ___Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002610
Book TitleNeminahacariya Part 2
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1971
Total Pages318
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size11 MB
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