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________________ ७८५] तइयभवि चित्तगइवुत्तंति सणतुकुमारचरिउ [७८२] इय विचिंतिरु चरणु अणुचरिवि अहियासिवि पुव्व-निय- कम्म-जणिय-गुरु-वाहि-वेयण । परिसीलिवि सयल-जिण- कहिय किरिय चिर-पाव-भेयण ॥ उसह-भरह-पमुहुत्तिमहं पुरिसह चरिय सरंतु । जिणवर-वयण-महोसहइं निच्चु वि हियइ धरंतु ॥ [७८३] सुहिण कुमरहं भावि मंडलियनिव-रज्जि वि अइगमिवि परिस-सहस पन्नास पिहु पिहु । चक्कित्ति समणत्तणि वि लक्खु लक्खु इय सवओ वि हु ॥ परिवालेवि अहक्कमिण तिण्णि परिस-लक्खाइं । आउय-अंति खविवि असुह- कम्म-रोग-दुक्खाई ॥ [७८४] समय-नीइण गंतु सम्मेयगिरि-रायह सिहर-तलि मासिएण तव-कम्म-जोगिण । निय-पावई विहडिउण विहिय-सुद्धि निम्मल-विवेगिण ॥ सणतुकुमार-सुरालयइ गयउ सु सणतुकुमारु । मह-रिसि गुरु-गुण-रस-मणु पाविय-जीविय-सारु ॥ [७८५] तत्थ महरिह-विसय-सुक्खाई सुरनाह-सामाणियहं मुरहं उचिय चिर-कालु सेविवि । कम-जोगिण पुणु तउ वि निय-ठिईए पज्जंतु पाविवि ॥ . होउ विदेहि निवंगरुहु सेविय-चरणायारु । सुगहिय-नामु सु सिज्झिहइ खविय-पाव-पब्भारु ॥ ७८३. १. क. सु and कु mixed in कुमर है. ७८४. ७. क. सु missing. Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002609
Book TitleNeminahacariya Part 1
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1970
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
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