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________________ २५० सम्पादनोपयुक्तग्रन्थसूचिः ग्रन्थनाम अनेकान्तजयपताका आत्मतत्त्व०= अभिधर्मकोशभाष्यम् आत्मतत्त्वविवेकः आवश्यकनियुक्तिः (नियुक्तिसंग्रहान्तर्गत) तत्त्वार्थश्लो०- तत्त्वार्थराजवार्तिकम तत्त्वार्थश्लोकवार्तिकम् तत्त्वार्थ०% तत्त्वार्थसूत्रम् तत्त्वार्थभाष्यसहितं तथा सिद्धसेनसूरिविरचितवृत्ति सहितम् । नाट्यशास्त्रम् न्यायकुमुदचन्द्र भा. १,२ प्रकाशकसंस्थादि गायकवाड ओरिएण्टल सीरीज, बरोडा, सन १९४०, १९४७ द्वारिकादासशास्त्री, बौधभारती, वाराणसी चौखम्बा संस्कृत सीरीज, वाराणसी हर्षपुष्पामृतजैनग्रन्थमाला, लाखाबावल, वि.सं.२०४५, सन १९८९ भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, सन १९९९ गांधीनाथारंगजैनग्रन्थमाला, मुंबई, वि.सं. १९७५, सन् १९१८ श्रेष्ठि देवचंद लालभाई जैनपुस्तकोद्धारफंड, सुरत वि.सं. १९८२ काशी संस्कृतग्रन्थमाला, चौखम्बा संस्कृत संस्थान, वाराणसी, वि.सं.२०३७ माणिकचन्द्र दि. जैन ग्रन्थमाला हिराबाग, गिरगांव, मुंबई ४. वि.सं. १९९५, १९९८ Edited by पण्डित दलसुखभाई मालवणिया Published by K. P. Jayaswal Research Institute, Patna, Bihar, 1955. आगमोदयसमिति, सुरत आचार्यमनोरथनन्दिवृत्तियुतम्, Edited by स्वामी द्वारिकादास शास्त्री, Published by बौद्धभारती, वाराणसी १९६८ हिन्दूविश्वविद्यालय नेपालराज्यसंस्कृतग्रन्थमाला, वाराणसी, सन १९५९ Peking Edition, Published by Tibetan Tripitaka Research Institute, Japan, Volume 130, No. 5710 Peking Edition, Volume 136-137, No. 5727 न्यायबिन्दुः धर्मोत्तरविरचितटीकया दुर्वेकमिश्रविरचितेन धर्मोत्तरप्रदीपेन च सहितः । प्रज्ञापनासूत्रम् प्रमाणवार्तिकम् प्रमाणवा०% प्रमाणवार्तिकस्ववृत्तिः प्रमाणविनिश्चयः प्रमाणविनिश्चयटीका प्रशमरतिः प्रशस्तपादभाष्यम् चौखम्बा, वाराणसी _Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002580
Book TitleDravyalankara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamchandra, Gunchandra, Jambuvijay
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year2001
Total Pages318
LanguageSanskrit, English
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size18 MB
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