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________________ [233 ] एकोनविंश अध्ययन सचित्र उत्तराध्ययन सूत्र रसन्तो कंदुकुम्भीसु, उड्डे बद्धो अबन्धवो। करवत्त-करकयाईहिं, छिन्नपुव्वो अणन्तसो॥५२॥ बन्धु-बान्धवों से रहित, असहाय, रोता-आक्रन्दन करता हुआ मैं कन्दुकुम्भी में ऊँचा बाँधा गया और करवत तथा क्रकच, आरा आदि शस्त्रों से अनन्त बार छेदा-भेदा गया हूँ॥५२॥ Without brothers and kin, helpless, wailing and screaming, I was suspended high in infernal cauldron and cut and pierced by knives and saws infinite times. (52) अइतिक्खकंटगाइण्णे, तुंगे सिम्बलिपायवे। खेवियं पासबद्धेणं, कड्ढोकड्ढाहिं दुक्करं॥५३॥ अत्यन्त तीक्ष्ण काँटों से आकीर्ण शाल्मली वृक्ष से.जाल (पाश) द्वारा बाँधकर मुझे इधर-उधर खींचा गया, उस दुस्सह कष्ट को मैं भोग चुका हूँ॥ ५३॥ I was tied with a net to a Shaalmali tree bristling with very sharp thorns and pushed and pulled from side to side. I have suffered such unbearable pain. (53) महाजन्तेसु उच्छू वा, आरसन्तो सुभेरवं। पीलिओ मि सकम्मेहिं, पावकम्मो अणन्तसो॥५४॥ अपने ही पापकर्मों के कारण बड़े-बड़े यन्त्रों-कोल्हुओं में मुझे इक्षु के समान अनन्त बार पीला गया। उन दुस्सह कष्टों को मुझे आक्रन्दन करते हुये भोगना पड़ा ॥ ५४॥ On account of my own sins I was crushed like sugarcane in large presses infinite times. I had to suffer those excruciating afflictions wailing. (54) कूवन्तो कोलसुणएहिं, सामेहिं सबलेहि य। पाडिओ फालिओ छिन्नो, विप्फुरन्तो अणेगसो॥५५॥ सूअर और श्वान रूपधारी श्याम और शबल नामक परमाधर्मी देवों द्वारा, इधर-उधर भागते हुये, चिल्लाते हुये मुझे पकड़ा गया, अनेक बार ऊपर से नीचे गिराया गया, फाड़ा गया और छिन्न-भिन्न किया गया॥ ५५॥ While running hither and thither screaming, I was caught many times by the most irreligious cruel divine beings named Shyama and Shabala in the guise of wild hog and dog respectively, and tossed down, torn to pieces and lacerated. (55) असीहि अयसिवण्णाहिं, भल्लीहिं पट्टिसेहि य। छिन्नो भिन्नो विभिन्नो य, ओइण्णो पावकम्मुणा॥५६॥ पापकर्मों के कारण मैं नरक में उत्पन्न हुआ। वहाँ मुझे अलसी के फूल के समान नीले रंग की तलवारों से, भालों से और लोहे के डण्डों से पीटा गया, छेदा गया, भेदा गया और खण्ड-खण्ड कर दिया गया ॥५६॥ I was born in hell for my sins. There I was cut, pierced and hacked to pieces with swords, daggers, spears and iron rods blue in colour like linseed flower. (56)
SR No.002494
Book TitleAgam 30 mool 03 Uttaradhyayana Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2011
Total Pages726
LanguageHindi, Prakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size28 MB
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