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________________ The atonement of less violence is said to less. To get any work done by householder for an ascetic is a transgression according to the third chapter of Dasvaikalik Sutra. Thus the expiation is more in doing so. उत्तरकरण करने का प्रायश्चित्त THE ATONEMENT OF UTTRAKARANA (REPAIRING) 14. जे भिक्खू सूईए उत्तरकरणं सयमेव करेइ, करेंतं वा साइज्जइ । 15. जे भिक्खू पिप्पलगस्स उत्तरकरणं सयमेव करेइ, करेंतं वा साइज्जइ । 16. जे भिक्खू णहच्छेयणगस्स उत्तरकरणं सयमेव करेइ, करेंतं वा साइज्जइ । 17. जे भिक्खू कण्णसोहणगस्स उत्तरकरणं सयमेव करेइ, करेंतं वा साइज्जइ । 14. जो भिक्षु सूई का उत्तरकरण-सुधार परिष्कार, स्वयं करता है अथवा करने वाले का समर्थन करता है। 15. जो भिक्षु कतरणी का उत्तरकरण-सुधार परिष्कार स्वयं करता है अथवा करने वाले का समर्थन करता है। 16. जो भिक्षु नखछेदनक का उत्तरकरण - सुधार परिष्कार स्वयं करता है अथवा करने वाले का समर्थन करता है। 17. जो भिक्षु कर्णशोधनक का उत्तरकरण - सुधार परिष्कार स्वयं करता है अथवा करने वाले का समर्थन करता है (उसे लघुमासिक प्रायश्चित्त देने का विधान होता है । ) नोट- उपरोक्त सूत्रों का विवेचन प्रथम उद्देशक के सूत्र 15-18 में देखें । 14. The ascetic who repairs the needle himself or supports the ones who repairs it. 15. The ascetic who repairs the scissors himself or supports the ones who repairs it. 16. The ascetic who repairs the nail cutter himself or supports the ones who does so. 17. The ascetic who repairs the ear bud himself or supprots the ones who does, a laghumasik atonement comes to him. प्रथम महाव्रत के अतिचार का प्रायश्चित्त THE EXPIATION OF THE PARTIAL TRANSGRESSION OF Ist FULL VOW 18. जे भिक्खू लहुसगं फरुसं वयइ, वयंत वा साइज्जइ । 18. जो भिक्षु अल्प कठोर वचन कहता है अथवा कहने वाले का समर्थन करता है (उसे लघुमासिक प्रायश्चित्त देने को आता है।) 18. The ascetic who speaks harsh words or supports the ones who speak so, a Laghumasik expiation comes to him. विवेचन - कठोर भाषा में कर्कश शब्दों का प्रयोग होता है, भाषासमिति का पालन करने वाले साधु-साध्वी को ऐसी कठोर भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भाषा सावद्य होती है। परिस्थितिवश यदि आवेश आ जाए तो वचनगुप्ति का पालन करते हुए मौन रहने का प्रयत्न करना चाहिए । द्वितीय उद्देशक (35) Second Lesson
SR No.002486
Book TitleAgam 24 Chhed 01 Nishith Sutra Sthanakavsi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2015
Total Pages452
LanguageHindi, Prakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_nishith
File Size20 MB
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