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________________ गीता दर्शन भाग-60 अगर आप अभी और यहीं एक क्षण को भी ठहरने को राजी हो ___ जब बुद्ध भाग रहे हैं, तो उनका सारथी उनसे कहता है कि आप जाएं, तो आपका परमात्मा से मिलन हो सकता है। क्या पागलपन कर रहे हैं! सारथी गरीब आदमी है। उसको अभी लेकिन हमारा मन बहुत होशियार है। अभी मैं बात कर रहा हूं, आशाएं हैं। वह प्रधान सारथी भी हो सकता है। वह सम्राट का मन कहेगा कि ठीक कह रहे हैं। घर चलकर इसकी कोशिश करेंगे। सारथी हो सकता है। अभी राजकुमार का सारथी है। अभी बड़ी घर चलकर? भविष्य! जरा किसी दिन फुर्सत मिलेगी, तो अकर्ता | | आशाएं हैं। वह बुद्ध को कहता है कि मैं बूढ़ा आदमी हूं; मैं तुम्हें बनने की भी चेष्टा करेंगे। भविष्य! समझाता हूं; तुम गलती कर रहे हो। तुम नासमझी कर रहे हो। तुम जो अभी हो सकता है, उसको हम कल पर टालकर वंचित हो | अभी यौवन की भूल में हो। लौट चलो। इतने सुंदर महल कहां जाते हैं। लेकिन रस तो केवल उन्हीं लोगों ने जाना है, जो वर्तमान मिलेंगे? इतनी संदर पत्नियां कहां मिलेंगी? इतना संदर पत्र कहां में प्रविष्ट हो गए हैं। बाकी लोगों ने सिवाय दुख के और कुछ भी | पाओगे? तुम्हारे पास सब कुछ है, तुम कहां भागे जा रहे हो! नहीं जाना है। वह सारथी और बुद्ध के बीच जो बातचीत है...। वह सारथी बुद्ध के जीवन में उल्लेख है...। बुद्ध को सभी सुख उपलब्ध गलत नहीं कहता। वह अपने हिसाब से कहता है। उसको अभी थे, जो आप खोज सकते हैं। लेकिन सभी सुख उपलब्ध होने में आशाओं का जाल आगे खड़ा है। ये महल उसे भी मिल सकते हैं एक बड़ा खतरा हो जाता है। और वह खतरा यह हो जाता है कि | भविष्य में। ये सुंदर स्त्रियां वह भी पा सकता है। अभी दौड़ कायम भविष्य की आशा नहीं रह जाती है। है। उसे बुद्ध बिलकुल नासमझ मालूम पड़ते हैं कि यह लड़का दुख में एक सुविधा है, भविष्य में आशा रहती है। जो कार | | बिलकुल नासमझ है। यह बच्चों जैसी बात कर रहा है। जहां जाने आप चाहते हैं, वह कल मिल सकती है, आज, अभी नहीं मिल | | के लिए सारी दुनिया कोशिश कर रही है, वहां से यह भाग रहा है! सकती। श्रम करेंगे, पैसा जुटाएंगे, चोरी करेंगे, बेईमानी करेंगे, | | आखिरी क्षण में भी वह कहता है कि एक बार मैं तुमसे फिर कहता कुछ उपाय करेंगे। कल, समय चाहिए। जो मकान आप बनाना | | हूं, लौट चलो। महलों में वापस लौट चलो। चाहते हैं, वक्त लेगा। तो बुद्ध कहते हैं, तुझे महल दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि तू उन लेकिन बुद्ध को एक मुसीबत हो गई, एक अभिशाप, जो वरदान | महलों में नहीं है। मुझे वहां सिर्फ आग की लपटें और दुख दिखाई सिद्ध हुआ। उनके पास सब था, इसलिए भविष्य का कोई उपाय न | पड़ता है। क्योंकि मैं वहां से आ रहा है। मैं उनमें रहकर आ रहा है। रहा। जो भी था, वह था। महल बड़े से बड़े उनके पास थे। स्त्रियां | | तू उनके बाहर है। इसलिए तुझे कुछ पता नहीं है। तू मुझे समझाने सुंदर से सुंदर उनके पास थीं। धन जितना हो सकता था, उनके पास की कोशिश मत कर। था। जो भी हो सकता था उस जमाने में श्रेष्ठतम, सुंदरतम, वह सब बुद्ध महल छोड़ देते हैं। और छः वर्ष तक बड़ी कठिन तपश्चर्या उनके पास था। करते हैं परमात्मा को, सत्य को, मोक्ष को पाने की। लेकिन छः वर्ष बुद्ध मुश्किल में पड़ गए। क्योंकि आशा का कोई उपाय न रहा। | की कठिन तपश्चर्या में भी न मोक्ष मिलता, न परमात्मा मिलता, न होप समाप्त हो गई। इससे बड़ा मकान नहीं हो सकता; इससे सुंदर | आत्मा मिलती। स्त्री नहीं हो सकती; इससे ज्यादा धन नहीं हो सकता। बुद्ध की बुद्ध की कथा बड़ी अनूठी है। छः वर्ष वे, जो भी कहा जाता है, तकलीफ यह हो गई कि उनके पास सब था, इसलिए भविष्य गिर | | करते हैं। जो भी साधना-पद्धति बताई जाती है, करते हैं। उनसे गुरु गया। और दुख दिखाई पड़ गया कि सब दुख है। वे भाग खड़े हुए। | घबड़ाने लगते हैं। अक्सर शिष्य गुरु से घबड़ाते हैं, क्योंकि गुरु जो ___ यह बड़े मजे की बात है, सुख में से लोग जाग गए हैं, भाग गए कहता है, वे नहीं कर पाते। लेकिन बुद्ध से गुरु घबड़ाने लगते हैं। हैं, और दुख में लोग चलते चले जाते हैं! सुख में लोग इसलिए भाग गुरु उनको कहते हैं कि बस, जो भी हम सिखा सकते थे, सिखा खड़े होते हैं कि दिखाई पड़ जाता है कि अब और तो कुछ हो नहीं | | दिया; और तुमने सब कर लिया। और बुद्ध कहते हैं, आगे सकता। जो हो सकता था, वह हो गया, और कुछ हुआ नहीं। और बताओ, क्योंकि अभी कुछ भी नहीं हुआ। तो वे कहते हैं, अब तुम भीतर दुख ही दुख है। भविष्य कुछ है नहीं। आशा बंधती नहीं। कहीं और जाओ। आशा टूट जाती है। आशा के सब सेतु गिर गए। बुद्ध भाग गए। जितने गुरु उपलब्ध थे, बुद्ध सबके पास घूमकर सबको थका 13901
SR No.002409
Book TitleGita Darshan Part 06
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOsho Rajnish
PublisherRebel Publishing House Puna
Publication Year1996
Total Pages432
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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