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________________ सूयगडम्मि [1. 13. 17भिक्खू मुयच्चे तह दिधम्मे गामं च नगरं च अणुप्पविस्सा । से एसणं जाणमणेसणं च अन्नस्स पाणस्स अणाणुगिद्धे ॥ १७ ॥ अरई रइं च अभिभूय भिक्खू बहूजणे वा तह एगचारी । एगन्तमोणेण वियागरेजा एगस्स जन्तो गइरागई य ॥ १८ ॥ सयं समेचा अदुवा वि सोचा भासेज धम्मं हिययं पयाणं । जे गरहिया सणियाणप्पओगा न ताणि सेवन्ति सुधीरधम्मा ॥ १९ ॥ केसिंचि तक्काइ अबुज्झ भावं खुदं पि गच्छेज असदहाणे । आउस्स कालाइयारं वघाए लद्धाणुमाणे य परेसु अहे ॥ २० ॥ कम्मं च छन्दं च विगिश्च धीरे विणइज ऊ सव्वउ आयभावं । रूवेहि लुप्पन्ति भयावहेहिं विजं गहाया तसथावरेहिं ॥२१॥ न पूयणं चेव सिलोयकामी पियमप्पियं कस्सइ नो करेजा । सव्वे अणहे परिवजयन्ते अणाउले या अकसाइ भिक्रवू ॥ २२ ॥ आहत्तहीयं समुपेहमाणे सव्वेहि पाणेहि निहाय दण्डं । नो जीवियं नो मरणाहिकंखी परिव्वएज्जा वलया विमुक्के ॥ २३॥ त्ति बेमि ॥ आहत्तहीयज्झयणं तेरहम गन्थन्झयणे चोदहमे 1.14. गन्थं विहाय इह सिक्खमाणो उट्ठाय सुबम्भचेरं वसेजा। ओवायकारी विणयं सुसिक्खे जे छेय से विप्पमायं न कुजा ॥१॥ जहा दियापोयमपत्तजायं सावासगा पविउं मन्नमाणं । तमचाइयं तरुणमपत्तजायं ढंकाइ अव्वत्तगमं हरेजा ॥२॥
SR No.002352
Book TitleSuyagadam Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorP L Vaidya
PublisherMotilal Sheth
Publication Year1928
Total Pages158
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sutrakritang
File Size10 MB
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