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________________ नीतिशास्त्र की परिभाषा / 71 और न्याय प्राप्त करने के उचित साधनों आदि का विवेचन नीतिशास्त्र का विषय बन सकता है। सम्भवतः प्लेटो की भी यही मंशा थी । यदि न्याय सबको सुलभ हो सके तो सम्पूर्ण समाज में स्वयमेव ही समग्रता और समन्वय स्थापित रहेगा। यूनानी दार्शनिकों का समय काफी पुराना है - ईसा से 5-6 शताब्दी पूर्व का। उसके बाद वहाँ ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में काफी लम्बा अन्तराल रहा । मध्ययुग, इस दृष्टि से अन्धकारपूर्ण रहा। उसके बाद ईसा की सत्रहवीं शताब्दी में पुनर्जागरण (renaissance) हुआ और यूरोप - पश्चिमी जगत ने प्रगति की ओर कदम बढ़ाये । ज्ञान - विज्ञान का भी पुनर्जागरण हुआ। इसके बाद नीतिशास्त्र पर भी काम हुआ । मैकेन्जी (Mackenzie) के अनुसार - " नीतिशास्त्र सत् (good ) और शुभ (right) का अध्ययन है ।" " Right की व्युत्पत्ति लैटिन के शब्द rectuh से हुई है, जिसका अर्थ है, 'सीधा अथवा नियम के अनुसार' और good जर्मन शब्द gut का रूपान्तर है, जिसका अभिप्राय है- 'परम शुभ के लिए उपयोगी । ' इस प्रकार मैकेन्जी की परिभाषा में दो तत्व हैं - नियम के अनुसार तथा परम शुभ के लिए उपयोगी। शुभ का प्रयोग साध्य के रूप में है और सत् का प्रयोग साधनों के रूप में। अभिप्राय यह है कि 'वह नियमानुसार आचरण जो परम शुभ की प्राप्ति में उपयोगी हो, नीतिशास्त्र का विषय है । इसे दूसरे शब्दों में नीतिशास्त्र का आधार भी कहा जा सकता है। यह परिभाषा व्यक्तिपरक भी है और समाजपरक भी । उस परम शुभ को प्राप्त करने के लिए मैकियावेली मनुष्य में सद्गुणों का होना आवश्यक बताता है और "सद्गुणों को वह बुद्धि और शक्ति का समन्वित रूप मानता है ।" " 1. Ethics may be defined as the study of what is Right or Good in conduct. ---Mackenzie, J. S.: A Manual of Ethics, p.1 - उद्धृत-डा. रामनाथ शर्मा : नीतिशास्त्र की रूपरेखा. पृ. 3 ----Machiavelly 2. Virtue as intellect plus force. Cf. Gorgias, 491– the real virtues of a man are courage (andreia ) and intelligence (phronesis). Quoted by—Will Durant : The Story of Philosophy p. 17
SR No.002333
Book TitleNitishastra Jain Dharm ke Sandharbh me
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDevendramuni
PublisherUniversity Publication Delhi
Publication Year2000
Total Pages526
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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