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________________ तप और भाव ऊनोदरिका तप । उसमें द्रव्य ऊनोदरिका तप के पाँच भेद हैं । ( १ ) अल्पाहारा (२) प्रपार्धा (३) द्विभागा, (४) प्राप्ता और ( ५ ) किंचिदूना। इन पाँचों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित प्रकार से है - ( १ ) अल्पाहारा - पुरुष द्वारा एक से आठ कवल ( कोळीया ) तक का प्रहार करना और स्त्री द्वारा एक से सात कवल (कोळीया ) तक का आहार करना; सो 'अल्पाहारा द्रव्य ऊनोदरिका तप' कहा जाता है । ( २ ) पार्धा - पुरुष द्वारा नव से बारह कवलं (कोळीया) तक का और स्त्री द्वारा आठ से ग्यारह कवल. ( कोळीया ) तक का आहार करना, वह 'अपार्धा द्रव्य ऊनोदरिका तप' कहा जाता है । (३) द्विभागा - पुरुष द्वारा तेरह से सोलह कवल ( कोळीया) तक का और स्त्री द्वारा बारह से चौदह कवल ( कोळीया ) तक का आहार करना, सो 'द्विभागा द्रव्य ऊनोदरिका तप' कहा जाता है । ( ४ ) प्राप्ता - पुरुष द्वारा सत्तरह से चौवीस कवल ( कोळीया) तक का और स्त्री द्वारा पंदरह से एकवीश कवल (कोळीया ) तक का आहार करना, वह 'प्राप्ता द्रव्य ऊनोदरिका तप' कहा गया है । (५) किंचिदूना - पुरुष द्वारा पच्चीस से एकत्रीश श्री सिद्धचक्र - नवपदस्वरूपदर्शन- २६६
SR No.002288
Book TitleSiddhachakra Navpad Swarup Darshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSushilsuri
PublisherSushilsuri Jain Gyanmandir
Publication Year1985
Total Pages510
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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