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________________ फलक ५ चित्र फलक ३३. अलकजाल : (पृ० १५३) राजघाट (काशी) से प्राप्त एक मृणमूर्ति । (कला और संस्कृति पृ० २४७) ३४. मौलि : (पृ० १५६) चूर्ण विशेष द्वारा धुंघराले बनाये गये बालों को त्रिविभक्त मौलिबद्ध केश रचना । (वही पृ० २५१) ३५. केशपाश : (पृ० १५४) पत्र और पुष्प मंजरी से सजा कर मुकुट की ___तरह बांधे गये केश । (वही पृ० २५१) । ३६. कुन्तलकलाप : (पृ० १५३) मोर की पूंछ के अग्रभाग की तरह सँभारे ____ गये कुन्तल । (वही पृ० २४८) ३७. वेणिदण्ड : (पृ० १५७) वेणिदण्ड या इकहरी चोटी । अमरावती० फलक ८, चित्र २३) ३८. जूट : (पृ० १५०) जूट या जूड़ा । (अमरावती० फलक ९, चित्र २) ३९. धम्मिल : (पृ० १५५) एक विशेष प्रकार का धम्मिल । ( वही, फलक ९, चित्र ३) Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.002134
Book TitleYashstilak ka Sanskrutik Adhyayana
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGokulchandra Jain
PublisherParshwanath Shodhpith Varanasi
Publication Year1967
Total Pages450
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
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