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________________ परि. 21 : प्रयुक्त ग्रंथ सूची 349 राजप्रश्नीय (उवंगसुत्ताणि खण्ड १)-वाप्र. आचार्य तुलसी, सं. युवाचार्य महाप्रज्ञ, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 1989 / राजप्रश्नीय टीका-गूर्जर ग्रंथरत्न कार्यालय, अहमदाबाद, वि.सं. 1994 / राजवार्तिक-सं. प्रो. महेन्द्रकुमार जैन, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, सन् 1990 / वसुदेवहिंडी-संघदासगणि, मुनि चतुरविजय, मुनि पुण्यविजय, गुजरात साहित्य अकादमी, सन् 1989 / विशेषावश्यकभाष्य-आ. जिनभद्रगणी क्षमाश्रमण, दिव्य दर्शन ट्रस्ट, मुम्बई, वि.सं. 2039 / विशेषावश्यकभाष्य स्वोपज्ञ टीका-आ. जिनभद्रगणी क्षमाश्रमण, सं. दलसुखभाई मालवणिया, लालभाई दलपतभाई भारतीय संस्कृति विद्या मंदिर, सन् 1968 / व्यवहारभाष्य-वाप्र. आचार्य तुलसी, प्रसं. आचार्य महाप्रज्ञ, सं. डॉ. समणी कुसुमप्रज्ञा, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 1996 / / समवाओ-वाप्र. आचार्य तुलसी, सं. युवाचार्य महाप्रज्ञ, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 1984 / समवायांग टीका-सं. आ. सागरानंद, मोतीलाल बनारसीदास इण्डोलाजिकल ट्रस्ट, दिल्ली, सन् 1985 / सूत्रकृतांग टीका--आचार्य शीलांक, सं. मुनि जम्बूविजय, मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली, सन् 1978 / सूत्रकृतांग नियुक्ति (नियुक्ति पंचक)-वाप्र. आचार्य तुलसी, प्रसं. आचार्य महाप्रज्ञ, सं. समणी कुसुमप्रज्ञा, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 1999 / सूयगडो-वाप्र. आचार्य तुलसी, प्रसं. आचार्य महाप्रज्ञ, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 2006 / स्थानांग (ठाणं)-वाप्र. आचार्य तुलसी, सं. मुनि नथमल, जैन विश्व भारती, लाडनूं (राज.), सन् 1976 / स्थानांग टीका-आ. अभयदेव, सं. मुनि जम्बूविजय, मोतीलाल बनारसीदास इण्डोलाजिकल ट्रस्ट, दिल्ली, सन् 1985 / हरिवंश पुराण-सं. पन्नालाल जैन साहित्याचार्य, भारतीय ज्ञानपीठ, काशी, सन् 1962 / सहायक ग्रंथ सूची आगम युग का जैन दर्शन-पं. दलसुखभाई मालवणिया, प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर, सन् 1990 / गणधरवाद-पं. दलसुखभाई मालवणिया-राजस्थान प्राकृत भारती संस्थान, जयपुर, सन् 1982 / जैन आगम : इतिहास एवं संस्कृति-रेखा चतुर्वेदी, अनामिका पब्लिशर्स एवं डिस्टीब्यूटर्स, दिल्ली, सन् 2000 / जैन आगम साहित्य में भारतीय समाज-डॉ. जगदीशचन्द्र जैन, चौखम्भा विद्याभवन, वाराणसी, सन् 1965 / जैन बौद्ध और गीता के आचार दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन-प्रो. सागरमल जैन, प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर, सन् 1999 / जैन संस्कृत महाकाव्यों में भारतीय समाज-डॉ. मोहनचंद्र, इस्टर्न बुक लिंकर्स, दिल्ली, सन् 1989 / जैन साहित्य का बृहद् इतिहास भा. २-डॉ. मोहनलाल मेहता, डॉ. जगदीशचन्द्र जैन, पार्श्वनाथ विद्याश्रम, वाराणसी, सन् 1989 / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001945
Book TitleAgam 41 Mool 02 Pind Niryukti Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDulahrajmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2008
Total Pages492
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_pindniryukti
File Size9 MB
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