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________________ अलिप्तता है ब्राह्मणत्व जायेगा। क्योंकि जो चलने को तैयार है, वह आज नहीं कल समझने लगेगा कि मैं भटक रहा हूं। जहां-जहां भटक रहा हूं, वहां-वहां से पैर मुड़ने लगेंगे। तंत्र का खतरा है कि हम अपने को धोखा न दे रहे हों कि हम सोचें कि हम कामवासना का उपयोग कर रहे हैं, और उपयोग कर-कर के हम धीरे-धीरे मुक्ति की अवस्था में पहुंच जायेंगे, और यह कामवासना हमारी आदत बन जाय । और निकलना तो दूर हो, हम और इसके गहरे जाल में फंसते चले जायें। क्योंकि जितना अभ्यास होता चला जाता है, उतनी आदतें जंजीर की तरह मजबूत होती चली जाती हैं। ___ योग का भी खतरा है । योग का खतरा है कि साक्षी-भाव के नाम पर कहीं हम दमन न करने लगें, कहीं हम वासनाओं को दबा न लें; क्योंकि दबी हुई वासनाएं जहर हो जाती हैं; और दबा हुआ चित्त बुरी तरह कामुक हो जाता है। जानकर हैरान होंगे, साधारण मनुष्य इतना कामक नहीं होता, जितना दमित व्यक्ति कामकहो जाता है और दमित व्यक्ति को सब तरफ कामवासना ही दिखायी पड़ने लगती है। क्योंकि जो आप दबाते हैं, उसकी पर्त आपकी आंख पर फैल जाती है । वह आपका चश्मा बन जाता है। और कामवासना को दबाया हुआ आदमी खोद-खोदकर जगह-जगह कामवासना देखने लगता है। मैंने सुना है, मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी ने पुलिस में रिपोर्ट की कि मेरे मकान के पास ही जो नदी बहती है, वहां कुछ युवक नग्न स्नान कर रहे हैं। मेरे चौके की खिड़की से वे मुझे दिखायी पड़ते हैं । यह बर्दाश्त के बाहर है। यह अशोभन है; अश्लील है। पुलिस को तत्क्षण कुछ करना चाहिए। ___ पुलिस आयी; युवकों को समझाया। युवक पहले तो थोड़े रुष्ट हुए, फिर राजी हो गये, और आधा मील दूर नदी में नीचे चले गये। लेकिन घंटे भर बाद फिर श्रीमती नसरुद्दीन का फोन पुलिस स्टेशन आया कि पुलिस कुछ करे; लड़के अभी भी नदी में नहा रहे हैं और नग्न हैं। लेकिन पुलिस के अधिकारी ने कहा कि देवी, अब वे आधा मील दूर चले गये हैं। अब तुम्हारी खिड़की से उन्हें देखने का कोई उपाय भी नहीं है। श्रीमती नसरुद्दीन ने कहा, 'उपाय है! विद माइ बायनाक्यूलर्स आइ कैन सी देम—मैं अपनी दूरबीन से देख सकती हूं। कठिनाई नग्न लड़कों के स्नान में नहीं थी, कठिनाई कहीं श्रीमती नसरुद्दीन के मन में ही है। दमित व्यक्ति ऐसी कठिनाई से भर जाता है। वह दूरबीन ले लेता है और सब तरफ वह एक ही चीज की तलाश करता रहता है। __ होगा ही। क्योंकि जो दबाया है, वह बदला लेगा । जीवन बदला लेगा । जिस वासना को आपने जोर से दबा लिया है, वह प्रतीक्षा कर रही है कि कब आप पर कब्जा कर ले, कब आपको जकड़ ले। लेकिन हमें दिखायी नहीं पड़ता । योग का खतरा हमें कम दिखायी पड़ता है तंत्र का खतरा ज्यादा दिखायी पड़ता है। इसी कारण तंत्र सार्वभौम नहीं बन पाया और योग का काफी प्रभाव हुआ। क्योंकि दमन ज्यादा सूक्ष्म है और व्यक्ति को अपने भीतर करना होता है; और उसकी खबर किसी को भी नहीं मिलती। ___ मैं साधुओं से मिलता हूं। और जब भी साधु मुझे एकांत में मिलते हैं, तो उनकी परेशानी कामवासना होती है। और वे मुझे कहते हैं, 'कोई रास्ता बतायें । वर्षों हो गये; उपवास करते हैं, सामायिक करते हैं, शास्त्र पढ़ते हैं, अध्ययन, मनन, स्वाध्याय सब करते हैं। अपने को सब भांति रोका है, निग्रहीत किया है, लेकिन वासना जाती नहीं, बल्कि बढ़ती चली जाती है। अगर साधुओं के स्वप्न जांचे जायें, तो वे सदा ही कामवासना के होंगे। क्योंकि जो दिन में दबाया है, वह रात चेतना को पकड़ लेता है। इसलिए साधु रात सोने तक से डरने लगते हैं, भयभीत हो जाते हैं। जीवन इतनी आसान बात नहीं है। जीवन जटिल है, और उसके साथ अत्यंत कलात्मक व्यवहार करने की जरूरत है । दमन कोई 361 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001821
Book TitleMahavira Vani Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOsho Rajnish
PublisherRebel Publishing House Puna
Publication Year1998
Total Pages596
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Sermon, & Religion
File Size12 MB
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