SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 166
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ૧૨૩ ५० ५० मे० नेएजस्सं, नेएज्जस्सामि, नेएज्जहामि, नेएज्जाहामि, एज्जहिमि, नेएज्जाहिमि, *नेएज्ज, नेएज्जा वगैरे ३५। थाय छे. कर-मा घातुन भविष्यमां का माहेश वि४६ याय का आदेश थाय त्यारे प्रथम पुरुषना मेवयनमा काहं मे ३५ विपे थाय छे. ते प्रमाण दा घातुनु प दाहं मे ३५ વિકલ્પ થાય છે. का (क) એકવ૦ ५० ५० काहं, कारसं, कास्सामो-मु-म, कास्सामि, काहामि, ___ काहामो-मु-म, काहिमि. काहिमो-मु-म, काहिस्सा, काहित्था. मी० पु० काहिसि-से. काहित्था, काहिह. त्री० ५० काहिइ-ए, काही. काहिन्ति-न्ते, काहिरे. બહ૦ ५० ५० करिस्स, करिस्सामि, करिहामि, करिहिमि, करेस्सं, करेस्सामि. करेहामि, करेहिमि, વગેરે રૂપ દુર્ પ્રમાણે જાણવા. दा ५० ५० दाहं, दास्सं, दास्सामो-मु-म, दास्सामि, दाहामि, दाहामो-मु-म, दाहिमि. दाहिमो-मु-म, दाहिस्सा, दाहित्था. थी. ५० दाहिसि-से, दाहित्था, दाहिह, दास्ससि-से. दास्सह. * षड् भाषा प्रभारी नेएहिज्ज, नेएहिज्जा थाय छे. (परिशिष्ट २.नि.४) Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001734
Book TitlePrakrit Vigyana Pathmala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOpera Jain Society Sangh Ahmedabad
PublisherOpera Jain Society Sangh Ahmedabad
Publication Year1988
Total Pages512
LanguagePrakrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Education, & Grammar
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy