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________________ वतीसमो गंधि जो पेसिउ यो सन्दु पबच्चर निवई गिएनि सुणेवि वाइसई स-रहमु स-हरिसु सव्वु पणच्चउ दुम्मियाई पर-उत्त-चित्तई ८ घत्ता मंछुड आयउ कुरुव-बलु णांदिघोसु गडीउ -नि स-रहसु रण-र-रोसाऊरिउ किह रिउ भग्ग णरेण विनिउ ।। ९. ४ उत्तर जाम णिहा ठइ साह ता, गिराउहु गहिय-पसाहणु दहि-दुव्वक्खय-दप्पण-हत्थर उज्जल-वेस-गहणु वीसत्थउ बहु-माणेहिं सई तित्तीभूएहि जासु पहिज्जइ मागह-सूएहि उत्तर-मच्छ वे-वि जए घण्णा पिडिविहे तिलय-भूय उप्पण्णा जयसिरि-रामालिंगिय-विगह जेहिं णियत्तिय विणि-वि गोग्गह भणइ कुमार पणाविय-मत्थउ अजुण रहु खेडहि वीसत्थउ वइरि ण होति सेण्णु महु करउ अणुदिणु णयणाणंद-जणेरउ ताम परायउ सोम-सदसणु णिय-पडिवत्तिए किउ संभासणु ८ घत्ता जणणिहे तुहु सुउ एक्कु पर तिह तिह तहा मुहु उत्तरही जिह जिह सुहियणेण पभणिज्जइ । हिम-हय-कमलु-व सामलइज्जइ ॥ ९ तहि अवसरे वियडुण्णय-वच्छे पुत्त महारउ मंगल-मूलेहि विण्णि-वि रमहुँ ताम वर-अक्खेहिं दूरोवग्गि-दुरिय-कलंके अज्जु महोच्छवे जूउ ण छिप्पइ जूएं णलु परियण-परिचत्तउ वुच्चइ ककु पुरोहिउ मच्छे पइसइ जाम हियय-अणुकूलेहि एक-दुय-त्तिय-चउरहिं लक्खेहि कइक इ-कंतु णिवारिउ कं कोव-हुवासणु जेण पलिप्पइ जूएं काई जुहिट्ठिलु पत्तउ ४ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001427
Book TitleRitthnemichariyam Part 2
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorRamnish Tomar, Dalsukh Malvania, H C Bhayani
PublisherPrakrit Text Society Ahmedabad
Publication Year1993
Total Pages220
LanguagePrakrit, Apabhransh
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size9 MB
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