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________________ २५९९ [५२] विषय गाथा विषय गाथा वृत्तविस्तारके निकालने का विधान २५९८ भरतादि क्षेत्रोंका क्षेत्रफल २७१० कुरुक्षेत्रके वक्र वाणका प्रमाण धातकीखण्डके जम्बूद्वीपप्रमाप्य खण्ड २७१४ धातकीवृक्ष व उनके परिवारवृक्षोंका विजयादिकोंका शेष वर्णन निरूपण २६०० भरतादि अधिकारोंका निरूपण २७१६ मेरु आदिकोंके विस्तारका निरूपण २६०४ कालोदसमुद्र व उसमें स्थित द्वीपोंकी विजयादिकोंका विस्तार २६१० ___ संख्या और विष्कम्भादि २७१८ कच्छा और गन्धमालिनीकी सूची २६१५ इन द्वीपोंमें स्थित कुमानुषोंका वृत्त-क्षेत्रकी परिधिके निकालनेका निरूपण २७२७ विधान और कच्छा व गन्धमालिनीकी कालोदके बाह्य भागमें स्थित कुमानुषसूचीकी परिधिका प्रमाण २६१७ द्वीपोंका निरूपण २७३५ पर्वतरुद्ध क्षेत्रका प्रमाण २६१८ कालोदसमुद्रका क्षेत्रफल २७३७ विदेहकी लम्बाईके निकालने का कालोदसमुद्रके जम्बूद्वीपप्रमाण खण्ड २७३८ विधान व उसका प्रमाण २६१९ । कालोदसमुद्रकी बाह्य परिधि २७३९ कच्छादेशकी लम्बाईका प्रमाण २६२१ कालोदसमुद्रस्थ मत्स्योंकी दीर्घतादि २७४० निज निज स्थानमें विदेहार्धका विस्तार २६२३ पुष्करवरद्वीप २७४४ विजयादिकोंकी विस्तारवृद्धिका प्रमाण २६२५ पुष्कर द्वीपके वर्णनमें सोलह अन्तविजयादिकोंकी आदिम, मध्यम और ___ राधिकारोंका निर्देश २७४५ अन्तिम लम्बाईके जानने का उपाय २६२९ मानुषोत्तर शैल व उसका उत्सेधादि २७४८ कच्छादिकोंकी तीनों लम्बाइयोंका समवृत्त क्षेत्रके क्षेत्रफल निकालनेका प्रमाण २६३१ विधान २७६१ पद्मा व मंगलावतीकी सूची और मानुषोत्तरसहित मनुष्यलोकका क्षेत्रफल २७६२ परिधिका प्रमाण २६६५ वलयाकार क्षेत्रके क्षेत्रफल निकालपूर्वापर विदेहों की लंबाई २६६७ नेका विधान २७६३ पद्मा व मंगलावतीकी उत्कृष्ट लंबाई २६६९ मानुषोत्तर पर्वतका क्षेत्रफल २७६४ पद्मादि देशोंकी तीनों लंबाइयोंका मानुषोत्तरपर्वतस्थ बाईस कूटोंका प्रमाण २६७० निरूपण २७६५ हिमवदादि बारह कुलाचलोंका क्षेत्रफल २७०४ पुष्कराई इष्वाकार पर्वतोंकी स्थिति २७८४ दो इष्वाकार पर्वतोंका क्षेत्रफल २७०७ दोनों इष्वाकारों के अन्तरालमें स्थित चौदह पर्वतोंका समस्त क्षेत्रफल २७०८ विजयादिकों का आकार व संख्या २७८५ धातकीखण्डका समस्त क्षेत्रफल २७०९ तीन द्वीपोंमें विजयादिकोंकी समानता २७८८ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001274
Book TitleTiloy Pannati Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorA N Upadhye, Hiralal Jain
PublisherJain Sanskruti Samrakshak Sangh Solapur
Publication Year1956
Total Pages598
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size12 MB
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