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________________ ९६० शुक्लापाङ्क = मयूर २३।१२ शुचिदत्त (व्य) भगवान् महावीरका चतुर्थ गणधर ३१४२ शुद्धमध्यमा = मध्यम ग्रामकी मूर्च्छना १९।१६३ शुद्धान्त = अन्तःपुर १९३७ शुद्ध षड्जा= षड्जस्वरकी मूर्च्छना १९।१६१ शुभङ्कर (व्य) कुरुचन्द्रका पुत्र ४५९ शुभा (भी) विदेहकी एक नगरी ५।३६० शुभ्रपुर (भी) राजा सूर्यके द्वारा बसाया नगर १७।३२ शूर (भी) देशका नाम ११।६६ शूर (व्य) मथुराके भानु और यमुनाका पुत्र ३३ ।९७ शूर (व्य) यदुवंशी राजा नरपतिका पुत्र १८८ शूर्पणखी (व्य) त्रिशिख विद्याधरकी विधवा पत्नी २६।२६ शूरदत्त (व्य) मथुराके भानु और भानुदत्ताका पुत्र ३३१९७ शूरसेन (व्य) मथुराके भानु और मथुराका पुत्र ३३ ९८ शूरसेन (व्य) मथुराका राजा ३३।९६ शूरसेन (व्य) वसुदेवकी एक स्त्री ३१।७ शृगालदत्त (व्य ) एक भील २७/७० शेषवती (व्य) भीमकी स्त्री ४७।१८ शैल (व्य) अचलका पुत्र४८ ४९ शौर्यपुर (भौ) वटेश्वर के पास विद्यमान नगर विशेष १८१९ शैलन्ध्री (व्य) द्रौपदी ४६ । ३२ Jain Education International हरिवंशपुराणे शैवेय (व्य) नेमिनाथ ६१।१६ शोक (पा) असातावेदनीयका आस्रव ५८।९३ शोणितपुर ( भो ) विजयार्धका एक नगर, जहाँ बाण विद्याधर रहता था५५।१६ शौच (पा) सातावेदनीयका आस्रव ५८।९४ शौरि (व्य) यादव-यदुवंशी १९७ शौरि = वसुदेव १९५९ श्मशाननिलय = विद्याधरकी जाति २६।१६ श्यामा (व्य) एक कन्या, जिसका वसुदेवके साथ सम्बन्ध हुआ ११८०१ श्यामा = यौवनवती १९।७५ श्यामा (व्य) अशनिवेग विद्या घरकी कन्या जिसे वसुदेवने विवाहा १९।७५ श्यामकछाया (व्य) वसुदेवकी स्त्री श्यामाकी दासी १९।११२ श्यामक (भौ ) अन्तिम सोलह द्वीपों में चौथा द्वीप ५।६२३ श्लक्ष्णरोम (व्य ) सिंहलका राजा ४४/२० श्लक्ष्णरोमा (व्य) लक्ष्मणा रानीका पिता ६०१८५ इलेष्मान्तक ( भी ) एक वन ४५।६९ श्वपाकी == विद्याधरोंकी एक जाति २६।१९ श्वसन = वायु ५५/३५ श्वेताम्बिका ( भी ) एक नगरी ३३।१६१ श्वेतमानु = सूर्य ९।१४६ श्रद्धावान् (भी) पश्चिम विदेह का वक्षारगिरि ५।२३० For Private & Personal Use Only श्रद्धावत (भौ) हैमवत क्षेत्रके मध्य में स्थित एक गोलाकार पर्वत ५।१६१ श्रमजवारि = पसीना ५५।१२ श्रव्या = श्रवण करने योग्य मनोहर २०१२ श्रावक = देशव्रतके पालक ३।६३ श्रावकाध्ययनाङ्ग (पा) द्वाद शांगका एक भेद, अपरनाम उपासकाध्ययनांग २ ९३ श्रावस्ती (भी) एक नगरी २८/५ श्री (व्य) रुचिकगिरिके रुचककूटपर रहनेवाली देवी ५।७१६ श्री (व्य) पद्मसरोवरमें रहनेवाली देवी ५।१३० श्री (व्य) राजा प्रचण्डवाहनकी पुत्री ४५।९८ श्रीकान्त (व्य ) आगामी चक्रवर्ती ६०।५६५ श्रीकान्ता (व्य ) अरिष्टपुरके राजा हिरण्यनाभकी स्त्री ४४३७ श्रीकान्ता ( व्य ) अशोक और श्रीमतोकी पुत्री ६०/६९ श्रीकान्ता ( भी ) मेरुके वायव्य में स्थित वापी ५। ३४४ श्रीकान्ता ( व्य ) शूरकी स्त्री ३३।९९ श्रीकूट ( भी ) हिमवत् कुलाचलका छठा कूट ५/५४ श्रीकूट ( भो) वि. द. नगरी २२ ९७ श्रीचन्द्र (व्य) आगामी बलभद्र ६०१५६८ श्रीचन्द्र (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।१२ श्रीचन्द्र (व्य) नागपुरका राजा ३४।४३ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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