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________________ हरिवंशपुराणे वृक्षमूल = दितिदेवीके द्वारा प्रदत्त विद्यानिकाय २२।६० वृत्तरथ (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२८ वृत्त = पदगत गान्धर्वकी विधि १९।१४९ वृत्तवैताड्य (भौ) नाभिगिरि पर्वत ५।५८८ वृत्ति = वैणस्वरका एक भेद १९।१४७ वृकार्थक (भौ) देशविशेष ३।४ वृकोदर (व्य) भीमसेन पाण्डव ५४।६६ वृत्त = गोल ३१५५ वृन्दावन (भौ) मथुराके समीप___ वर्ती एक उपनगर ३५।२८ वृषभ (व्य) प्रथम तीर्थंकर ३१७ वृद्धार्थ (व्य) वसुदेवको स्त्री पद्मावतीका पुत्र ४८१५६ वृषामन्त (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२८ वृषभध्वज (व्य) वीतभीका पुत्र १३।११ वृषमध्वज (व्य) उज्जयिनीका राजा ३३।१०३ बृषध्वज (व्य ) वैदिशपुरका राजा ४५।१०७ वृषभदत्त (व्य) कुशाग्रपुर निवासी एक पुरुष मुनि सुव्रतनाथको प्रथम आहार देनेवाला १६।५९ वृषमपर्वत(भौ) चौंतीस वृषभा चल, भरत और ऐरावतमें एक-एक तथा बत्तीस विदेहोंमें बत्तीस ५।२८० वृषमसेन (व्य) भगवान् वृषभ देवका गणधर १२१५५ वृषभसेन (व्य) भगवान् वृषभ देवके पुत्र ९।२३ वृषध्वज (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२८ वृष्णिपुत्र (व्य) अन्धकवृष्णिके __दश पुत्र ११७८ वेगवती (व्य) वसुदेवकी एक विद्याधर स्त्री २६।३३ वेगवती (भौ) एक नदी४६०४९ वेगवान् (व्य) वसुदेव और वेग वतीका पुत्र ४८।६० वेणु (व्य)मानुषोत्तरके पूर्वदक्षिण कोणमें स्थित रत्नकूटपर रहनेवाला देव ५।६०७ वेणु (भौ)वि. उ.नगरी २२।८९ वेणु (व्य) शाल्मली वृक्षपर रहनेवाला देव ५।१९० वेणुदारी (व्य) एक राजा५०२८५ वेणुदारी (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३९ वेणुदारी (व्य ) मानुषोत्तरके __ सर्वरत्नकूटका निवासी देव ५।६०८ वेणुदारिन् (व्य) शाल्मली वृक्ष पर रहनेवाला देव५।१९० वेद = ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद ११८३ वेदन (भी) तीसरी पृथिवीके प्रथम प्रस्तारसम्बन्धी तप्त नामक इन्द्रक विलकी दक्षिण दिशामें स्थित महा नरक ४१५४ वेदना (पा) आग्रायणी पूर्वके चतुर्थ प्राभृतका योगद्वार १०१८२ वेदसामपुर (भी) एक नगर ___ जहाँ वसुदेव गये २४।२५ वेलम्बकूट (भो) मानुषोत्तरके दक्षिण-पश्चिम कोणमें निषधाचलसे लगा एक कूट ५।६०९ बैकुण्ठ (व्य) श्रीकृष्ण ५०।९२ वैक्रिय = विक्रियाऋद्धिके धारक ३१४७ बैगारि (व्य) एक विद्याधर राजा २५।६३ वैजयन्त (भौ) जम्बूद्वीपकी जगतीका दक्षिण-द्वार ५।३९० वैजयन्त (भौ) वि. उ. नगरी २२१८६ वैजयन्त (व्य) वीतशोका नगरी का राजा २७१५ वैजयन्त (भौ) अनुत्तर विमति ६०६५ वैजयन्त (पा) स्फटिकसालका दक्षिण गोपुर ५७१५८ वैजयन्ती ( भो) विजयाधकी एक नगरी ३०॥३३ वैजयन्ती (पा) समवसरणके सप्तपर्ण वनकी वापिका ५७१३३ वैजयन्ती (भी) विदेहकी एक नगरी ५।२६३ वैजयन्ती (भो) नन्दीश्वर द्वीपके दक्षिण दिशासम्बन्धी अंजनगिरिकी दक्षिण दिशा सम्बन्धी वापिका ५।६६० वैजयन्ती (व्य) रुचिकगिरिके कांचनकूटपर रहनेवाली दिक्कुमारी देवी ५।७०५ वैजयन्ती (व्य) रुचिकगिरिके रत्नप्रभ कूटपर रहनेवाली देवी ५१७२५ वैडूर्य(भौ) रत्नप्रभाके खरभाग का तीसरा पटल ४।५२ वैडूयनील रंगका मणि २।१०। वैडूर्य (भौ) रुचिकगिरिका ऐशान दिशासम्बन्धी कूट ५७२२ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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