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________________ ९४२ महासेन (व्य ) जरासन्धका पुत्र ५२।३८ महासेन (व्य) कृष्णकी लक्ष्मणा स्त्रीका भाई ४४ २५ महासेन (व्य) उनसेनके चाचा शान्तनुका पुत्र ४८।२४० महासेन (व्य ) - एक आचार्य १।३३ महासेन (व्य) कृष्णका पुत्र ४८।७० महासेन ( व्य ) एक राजा ५०।१३१ महाहिमवत् (भी) जम्बूद्वीपका दूसरा कुलाचल ५।१५ महाहिमवस्कूट ( भी ) महाहिमयत्कुलाचलका दूसरा कूट ५।७१ महाहृदय (व्य) कुण्डलगिरिके अंकप्रभ कूटका निवासी देव ५।६९३ महीजय ( प ) समुद्र विजयका पुत्र ४८।४४ महीजय (व्य जरासन्धका पुत्र ५२/३० महीदत्त (व्य) पौलोमका पुत्र १७२८ महीधर (व्य) भगवान् ऋषभदेव का गणधर १२।५८ महीपाल (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३१ महेन्द्र ( भी ) कुण्डलगिरिका उत्तर दिशासम्बन्धी कूट ५।६९४ महेन्द्र (व्य) एक राजा६०।८१ महेन्द्र [भी] वि. उ. नगरी २२।१० महेन्द्र (व्य) अचलका पुत्र ४८१४९ महेन्द्रगिरि (व्य) वसुदेवकी Jain Education International हरिवंशपुराणे गन्धर्वसेना स्त्रीसे उत्पन्न पुत्र ४८।५५ महेन्द्रदत्त (व्य) षभदेवका गणधर १२/६६ महेन्द्रजित् (व्य) इन्द्रद्युम्नका पुत्र १३।१० महेन्द्रविक्रम (व्य ) उदितारा क्रमका पुत्र १३।१० महेन्द्रविक्रम (व्य) विजयार्धकी दक्षिण श्रेणीके शिवमन्दिर नगरका राजा २१।२२ महेन्द्रसेन (व्य ) एक मुनि४३ । १५० महोदय (व्य) समवसरणका एक मण्डप ५७।८६ माकन्दी [भी] एक नगरी ४५।१२० मागध [व्य ] पूर्व लवणसमुद्रका वासी देव ११७ मागध [ व्य] जरासन्ध १।१०८ मागध = राजा श्रेणिक ४५।३ मागधेशपुर [भी] नगरविशेष १८।१७ मातङ्ग-दिति देवीके द्वारा प्रदत्त विज्ञानिकाय २२।५९ मातङ्ग [ व्य] नमिका पुत्र २२.१०८ मातङ्ग = विद्याधरोंकी जाति २६।१५ मातङ्गपुर [भी] वि. द. नगरी २२।१०० मातरिश्वा = कुत्ता ४६५३ मातहि [ व्य] इन्द्र के द्वारा प्रेषित नेमिनाथ के रथका सारथि ५१।११ मातृष्वसा मौसी १८१२८ मात्रा-तालगत गान्धर्वका एक प्रकार १९।१५१ मादी [व्य) राजा पाण्डुकी द्वितीय स्त्री ४५।३८ For Private & Personal Use Only माधवी [भी] महातम - प्रभाका रूढि नाम ४/४६ मानव [भी] देशका नाम १९६ माणव (पा) चक्रवर्तीकी एक निधि ११।११० माण्डव्य [व्य बीरका ३।४२ माधवमास = वसन्तका महीना ५५४४३ माधव = [व्य ] श्रीकृष्ण ४२।६८ माधवी = एक लता ११।१०० मानव (व्य) अदिति देवीके द्वारा दत्त विद्याओंका एक निकाय २२।५७ मानव ( भो) वि. द. नगरी २२।९५ मानवपुत्रक - विद्याधरोंकी एक जाति २६८ मानवर्तिक (भौ) देशका नाम भगवान् महा छटा गणधर ११.६८ मानस वेग (व्य) चित्तवेग विद्या धरका पुत्र २४।७० मानसवेग (व्य) वसुदेवका वैरी एक विद्याधर २६/२७ मानसवेग (व्य) वसुदेवका सम्बन्धी एक विद्याधर ५१।३ |मानस्तम्भ=समवसरणकी चारों दिशाओं में स्थित महिमा - युक्त स्तम्भ २०७४ मानाङ्गणा (पा) समवसरणकी एक भूमि ५७१९ मानुषोत्तरभूभृत् (भी) पुष्कर द्वीप के मध्य में स्थित चूडीके आकारका पर्वत ३।५७७ मानुषोत्तर ( भी ) मेरु पर्वतका एक वन ५।३०७ मानुष (व्य) मानुषोत्तर के रजत www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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