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________________ शब्दानुक्रमणिका पद्मासन (व्य) विमलनाथ भगवान्का पूर्व भवका नाम ६०।१५३ पद्मावती (व्य ) रुचिकगिरिके पद्मकूटपर रहनेवाली देवी ५७१३ पद्मावती (व्य) वसुदेवकी एक स्त्री ११८३ पद्मावती (भौ) विदेहकी एक नगरी ५।२६० पद्मावती (व्य ) मुनिसुव्रत भगवान्की माता राजा सुमित्रको रानी १६।२ पद्मावती (व्य) एक दिक्कुमारी देवी ८।११० पद्मावतो (व्य) भोजक वृष्णिकी स्त्री १८।१६ पद्मोत्तर (भौ) मेरुपर्वतसे पूर्वको ओर सीमा नदीके उत्तर तटपर स्थित कूट ५।२०५ पद्मोत्तर (व्य) कुण्डलगिरिका वासी एक देव ५।६९१ पद्मोत्तर (व्य) रुचकगिरिके नन्द्यावर्तकूटपर रहनेवाला देव ५१७०२ पद्मोत्तर (व्य) वासुपूज्य भगवान् का पूर्वभवसम्बन्धी नाम ६०।१५३ परमाणु(पा)पुद्गलद्रव्यका सबसे छोटा हिस्सा ७।१७ परमावधि (पा) अवधिज्ञानका एक भेद १०।१५२ परविवाहकरण (पा) ब्रह्मचर्याणु व्रतका अतिचार ५८।१७४ परशुराम (व्य) जमदग्निका पुत्र २५।९ परस्पर कल्याणविधि (पा) एक व्रतका नाम ३४।१२४ पराख्य (व्य) भगवान् ऋषभ देवका एक गणधर १२॥६१ परावर्त (पा) तालगत गान्धर्व __ का एक भेद १९।१५० परिकर्म (पा) द्वादशांगका एक भेद २।९६ परिखा = खाई ५७।२१ परिणाम(पा) कालद्रव्यका कार्य ७५ परिदेवन (पा) असातावेदनीय का आस्रव ५८।९३ परिव्राजक = संन्यासी २१११३४ परोक्षप्रभाण (पा) मतिश्रुतज्ञान १०।१५५ पर्याय ( पा) श्रुतज्ञानका भेद १०११२ पर्याय समास (पा) श्रुतज्ञानका भेद १०१२ पर्याप्ति (पा) नामकर्मका एक भेद ५६।१०४ पर्वत (व्य)क्षोरकदम्बका पुत्र मिथ्या मार्गको चलानेवाला १७३९ पर्वतक (व्य) एक भीलका नाम ६०१६ पलाशकूट (भौ) सीतोदा नदी के उत्तर तटपर स्थित एक कूट ५।२०७ पल्य(पा) व्यवहार कालका एक भेद ३।१२४ पल्लव (भौ) दक्षिण भारतका एक देश ६११४२ पाणिग्रहण-विवाह ४५।१४६ पाञ्चजन्य (व्य) कृष्णके शंखका नाम ११११२ पाण्डव (व्य) युधिष्ठिर आदि ४५।१ पाण्डु (भौ) पाण्डुकवनका एक भवन ५।३२२ पाण्डु (व्य) युधिष्ठिरादिके पिता ४५६३४ पाण्डु (व्य) ग्यारह अंगके ज्ञाता एक मुनि ११६४ पाण्डुक (भौ) मेरुका एक भाग ५।३०९ पाण्डुक (भौ) राजगृहीके पांच पहाड़ों में से एक पहाड़ ३१५५ पाण्डुक (भौ) वि. उ. श्रे. का एक नगर २२१८८ पाण्डुक (व्य) कुण्डलगिरिके महेन्द्र कूटका वासी देव ५।६९४ पाण्डुक-विद्याधरोंकी एक जाति २६१७ पाण्डुका (भौ) सुमेरुके पाण्डुक वनमें स्थित एक शिला २।४१ पाण्डुकम्बला (भी) पाण्डुक वन __ की एक शिला ५।३४७ पाण्डुकी (व्य) विद्याविशेष २२।८० पाण्डुकेय (व्य) पाण्डुकी विद्यासे सम्बद्ध विद्याधर २२।८० पाण्डुर (व्य) कुण्डलगिरिके हिमवत् कूटका वासो देव पाण्डुर ( व्य) क्षीरवरद्वीपका रक्षक देव ५।६४१ पात्र (पा) जिन्हें दान दिया जाता हो ऐसे मुनि, श्रावक और अविरत सम्यग्दृष्टि ७।१०८ पात्री = एक मंगल द्रव्य ५।३६४ पाद (पा) छह अंगुलोंका एक पाद होता है ७।४५ पाद भाग(पा)तालगत गान्धर्व. का एक प्रकार १९।१५१ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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