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________________ ९२० [ट ] टण देश (भौ) एक देश २१११०३ [त ] तडित्प्रभ (भौ) निषध पर्वतसे उत्तर की ओर नदीके मध्य में स्थित एक हद ५।१९६ तत = तारसे बजनेवाले बाजे १९।१४२ तद्धित-पदगत गन्धर्वकी विधि १९।१४९ तनयसोम (व्य) नमिका पुत्र २२।१०७ तनुवात (पा) लोकको चारों ओरसे घेरनेवाला तीसरा वायुमण्डल ( वातवलय ) ५११ तप (पा) अनशनादि छह बाह्य और प्रायश्चित्त आदि छह अन्तरंगके भेदसे बारह प्रकारका तप २।१२९ तपन (भो) बालुकाप्रभा पृथिवी के तृतीय प्रस्तारका इन्द्रक विल ४।१२० तपन (व्य) तेजस्वीका पुत्र १३।९ तपनकूट (भौ) विद्युत्प्रभपर्वतका एक कूट ५४२२२ तपित (भौ)बालुकाप्रभा पृथिवी के द्वितीय प्रस्तारका इन्द्रक विल ४।११९ तपनीयक (भौ) मानुपोत्तरको आग्नेय दिशाका कूट५।६०६ तपनीयक (भौ) सौधर्म युगलका उन्नीसवाँ इन्द्रक ६।४६ तपनीयक कूट (भौ) मानुषोत्तर पर्वतकी आग्नेय दिशाका एक कूट ५।६०१ हरिवंशपुराणे तप्त (भौ) बालुकाप्रभा पृथिवीके । ताम्रलिप्त (भौ) एक नगर प्रथम प्रस्तारका इन्द्रक विल ४।११८ ताम्रलिप्ति (भौ) एलेयके द्वारा तप्तजला (भौ) विदेहक्षेत्रको एक अंगदेशमें बसाया हुआ विभगा नदी ५।२४० एक नगर १७।२० तपःशुद्धि = एक व्रतविशेष तार (भौ) पंकप्रभापृथिवीके ३४.९९ द्वितीय प्रस्तारका इन्द्रक तमक (भौ) पंकप्रभा पृथिवीके विल ४।१३० पंचम प्रस्तारका इन्द्रक तारा (व्य) राजा कीर्तवीर्यको विल ४।१३३ गर्भवती स्त्री २५।११ तमस् (भौ) धूमप्रभा पृथिवीके तारक (व्य) दूसरा प्रतिनारायण प्रथम प्रस्तारका इन्द्रक ६०।२९१ विल ४।१३८ तार्ण (भौ) देशविशेष ३।६ तमःप्रभा (भौ) नरकोंकी छठी ति ग्लोक ( भौ) मध्यलोक भूमि ४।४४ ५।१ तमस्तम (भौ) सातवाँ नरक तिर्यग्व्यतिक्रम (पा) दिग्वतका २।१३६ __ अतिचार ५८।१७७ तमिस्र (भौ) धूमप्रभा पृथिवीके तिरस्करिणी-एक विद्या २२।६३ पञ्चम प्रस्तारका इन्द्रक तिलका (व्य) भानुकीतिकी स्त्री विल ४११४२ ३३१३९ तमिस्र गुहा (भौ) विजयार्धको तिलकानन्द (व्य) एक मुनि गुहा ११।२१ ५०५९ तमोऽन्तक (व्य) चारुदत्तका तिलवस्तुक (भौ) एक नगर, मित्र २१११३ ____ जहाँ वसुदेव पहुँचे २४।२ तरङ्गिणी (भौ) एक नदी४६।४९ तीर्थ (पा) धर्मको आम्नाय १६४ तायकेतु (व्य) कृष्ण ५१११९ तीर्थकर (पा) धर्मकी आम्नाय ताप (पा) असातावेदनीयका चलानेवाला, ये २४ होते आस्रव ५८१९३ हैं २।१४६ तापन(भी)बालुकाप्रभा पृथिवीके तीर्थकृत् (पा) तीर्थकर ११८ चतुर्थ प्रस्तारका इन्द्रक तीर्णकर्ण (भौ) देशका नाम विल ४।१२१ १११६७ तापस (भौ)देशका नाम १११७२ तेज:सेन (व्य) समुद्रविजयका तामिन् (वि) पालक-रक्षक पुत्र ४८१४४ १।१० तेजस्वी (व्य) प्रभूत तेजका पुत्र तामित्रगुहक (भौ) विजयार्धका १३।९ आठवाँ कूट ५।२७ तेजस्वी (व्य) भगवान् ऋपभतामिस्रगुहकूट (भी) ऐरावतके देवका गणधर १२।५८ विजयाधका तीसरा कूट तेजोराशि (व्य) ऋषभदेवका ५।११० गणधर १२०६६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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