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________________ ९१२ [ख] खग = विद्याधर ४४|४ खग = विद्याधर १।१०४ खड्ग (भौ) देशका नाम ११।६८ खद्गा (भी) विदेहकी एक नगरी ५।२५७ खड्गा (भौ ) विदेहकी एक नगरी ५।२६३ खण्डक प्रपात (भौ) विजयार्ध - का तीसरा कूट ५।२६ खण्ड प्रपात कूट (भौ) ऐरावतके विजयार्धका सांतव कूट ५।१११ खण्डका पात (भी) विजयार्थ की गुफा ११।५३ खण्डिका (भौ) वि. उ. नगरी २२।८९ जुगनू १।५२ खद्योत = खमाली (व्य) एक तापस २७।११९ खर निदाघ तीक्ष्ण उष्णऋतु ५५१५० खरमाग ( भौ) रत्नप्रभा पृथिवीका पहला भाग ४।४८ खवंड (पा) पर्वत से घिरा नगर = २।३ खरी = गधी ६०।३१ खलप्याक दुर्जन रूपी सांप १॥४६ खलीकार-तिरस्कार १७११५७ खेट (पा) नगर और पर्वतसे घिरा नगर २।३ = [ग] गगनचन्द्र (व्य ) गगनवल्लभ नगरका राजा ३४।३५ गगनायन = आकाशगमन ३।१४ Jain Education International हरिवंशपुराणे गगनमण्डल (भो) वि. उ. नगरी २२०८५ गगनबलम (भी) बि. वि. उ. नगरी २२।८५ गगनवम (भौ) पुष्कलावती देश के वि. उ. का एक नगर ३४ |३४ गगनबलभा (व्य ) अच्युतेन्द्रकी महादेवी ६०|३८ गगन सुन्दरी (व्य) गगनवल्लभ नगरके राजा गगनचन्द्रकी स्त्री ३४।३५ गङ्ग, गङ्गदत (व्य ) हस्तिनापुरके राजा गंगदेव और नन्दयशाके युगल पुत्र ३६।१४१ गङ्गदत्त (व्य) कृष्ण ३३।२२ गङ्गदत्त (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२/३३ + गङ्गदेव (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।११ गङ्गदेव (व्य ) दशपूर्वके ज्ञाता एक आचार्य १६३ गङ्गरक्षित, नन्द (व्य) युगलयुक्त ३३।१४१ गङ्गा ( भी ) चौदह महानदियोंमेंसे एक नदी ५।१२३ गङ्गाकूट ( भी ) हिमवत् कुलाचलका पाँचवाँ कूट ५।५४ गङ्गादेवी (व्य) गंगाकूटपर रहनेवाली देवी ११.५१ गङ्गानुकूल = गंगाके किनारे किनारे ११।३ गङ्गा - सिन्धु (भी) विदेह क्षेत्रके कच्छा आदि देशों में बहने - वाली नदियाँ ५।२६७ गजकुमार (व्य ) श्रीकृष्णके एक भाई १।११६ गजपुर ( भी ) हस्तिनागपुर १८ १०३ For Private & Personal Use Only गजवती (भी) वरण पर्वतके समीप पंचनद समागमकी एक नदी २७|१४ गणधारिन् = तीर्थंकरकी प्रमुख श्रोता ज्ञानके धारी सभा अपर नाम गणधर ३१४१ गणभृद् = गणधर १।७५ गणबद्ध (व्य) भरत चक्रवर्तीके आज्ञाकारी देव ११।३७ गण्यपुर ( भी ) न. प. विदेहके रूप्याचलकी उत्तर श्रेणीका एक नगर ३४।१५ गति-तालगत गान्धर्वका एक प्रकार १९।१५१ गन्ध (व्य ) इक्षुवर समुद्रका रक्षक देव ५/६४४ गन्धकुटी (पा) समवसरणका एक स्थान जिसमें तीर्थंकर विराजते है ५७/७ गन्धदेवी कूट (भी) शिखरि कुला चलका नौवीं कूट ५।१०७ गन्धमादन (भौ) मेरुपर्वतकी पश्चिमोत्तर दिशामें स्थित स्वर्णमय एक पर्वत५।२१० गन्धमादन (व्य) हिमवत्का पुत्र ४८।४७ गन्धमादन (भो) वि. उ. नगरी २२।९७ गन्धमादन-शौर्यपुरके उद्यानमें स्थित गन्धमादन नामका एक पर्वत १८।२९ गन्धमादन (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३१ गन्धमादन (भौ ) एक पर्वत ६०।१६ गन्धमादन] कूट ( भी ) गन्धमादन पर्वतका एक कूट ५।२१७ गन्धमादिनी (भी) विदेहकी विभंगा नदी ५।२४२ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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