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________________ ९०६ ऐलेय (व्य) राजा दक्ष और __ इलाका पुत्र १७१३ ऐशान (भौ) द्वितीय स्वर्ग ४।१४ ऐशान = विद्यास्त्र २५६४९ ऐशान (भौ) दूसरा स्वर्ग ६३६ ऐशान = द्वितीय स्वर्गका इन्द्र २०३८ हरिवंशपुराणे एकशैल ( भो ) पूर्वविदेहका । वक्षारगिरि ५।२२८ एकातपत्र = अद्वितीय ३१३६ एकादशाङ्ग = आचारांग आदि ग्यारह अंग एकावलीविधि = एक उपवास ३४।६७ एणीपुत्र (व्य) श्रावस्तीका राजा २८.५ एणीपुत्र (व्य) श्रावस्तीके राजा शीलायुधकी ऋषिदत्ता स्त्रीसे उत्पन्न पुत्र २९।५३ एरा(व्य)राजा विश्वसेनकी स्त्री, भगवान् शान्तिनाथकी माता ४५।१८ एवंभूत (पा) एक नय ५८।४१ एषणा समिति (पा) दिनमें एक बार शुद्ध आहार ग्रहण करना २।१२४ एषणा समिति व्रत = व्रतविशेष ३४।१०८ [क] ककुभ-पूर्वादि दशों दिशाएँ ११८ कच्छ (व्य) ऋषभदेवका गणधर [ ऋ] ऋजुकूलापगा (भौ) गिरीडीहके पासकी वराकट नदी २।५७ ऋजुमति (पा) मनःपर्ययज्ञानका एक भेद १०।१५३ ऋजुसूत्र (पा) एक. नभ ५८.४१ ऋतु (भौ) सौधर्म युगल में प्रथम इन्द्रक ६।४४ ऋतु (पा) दो मासको एक ऋतु होती है ७२१ ऋद्धीश (भी) सौधर्म युगलका तेरहवाँ इन्द्रक ६।४५ ऋषभ = एक स्वर १९।१५३ ऋषभ (व्य) प्रथम तीर्थंकर ९।७३ ऋषि = ऋद्धिधारी मुनि ३.६१ ऋषिगिरि (भौ)राजगृहीकी एक पहाड़ीका नाम ३१५३ ऋषिगुप्त (व्य) ऋषभदेवका गणधर १२।६३ ऋषिदत्त (व्य) ऋषभदेवका गणधर १२।६३ ऋषिदत्ता (व्य) अमोघदर्शनकी चारुमति स्त्रीसे तापसोंके वनमें उत्पन्न कन्या२९॥३४ १२।६८ कच्छकावती (भौ)पश्चिम विदेह का एक देश ५।२४५ कच्छा (भी) पश्चिम विदेहका एक देश ५।२४५ कच्छा कूट (भी) माल्यवान् पर्वतका एक कूट ५।२१९ कजला (भौ) मेरुके नैऋत्यमें स्थित एक वापी ५।३४३ कजलप्रमा (भौ)मेरुके नैऋत्यमें स्थित एक वापी ५।३४३ कण्ठक-गलेका आभूषण ६२१८ कदन = युद्ध १११०८ कदम्बुक (भौ) लवणसमुद्र का पश्चिम दिशास्थित पाताल ५।४४३ कनक कनकाम (व्य) घृतवर समुद्रके रक्षक देव ५।६४२ कनक (व्य) आगामी प्रथम मनु ६०१५५५ कनक कूट (भी) मानुषोत्तरको पश्चिम दिशाका एक कूट ५६०४ कनककेशी (व्य) खमाली तापस की स्त्री २७।११९ कनकपुञ्जश्री (व्य) नमिकी पुत्री २२।१०८ [ऐ] ऐरावण (भौ) नील पर्वतसे साढ़े पाँच सौ योजन दूर नदीके मध्यमें स्थित एक ह्रद ५।१९४ ऐरावत = सौधर्मेन्द्रका हाथी ३८।२१ ऐरावतकूट (भौ) शिखरिकुला चलका दसवाँ कूट ५।१०७ ऐरावत (भो)जम्बू द्वीपकी उत्तर दिशामें शिखरिन् कुलाचल और लवणसमुद्रके मध्य स्थित सातवा क्षेत्र ५।१४ ऐरावती (भौ) एक नदी . २७।११९ ऐरावती (भौ) एक नदी २१११०२ [ए] एक कल्याणविधि % व्रतविशेष ३४।११० एकस्ववितर्कावीचार(पा) शुक्ल ध्यानका दूसरा भेद ५६०६५ एकपर्वा = एक विद्या २२।६७ एकभक्त (पा) मुनियोंका एक मूलगुण, दिनमें एक बार ही भोजन करना २।१२८ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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