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हरिवंशपुराणे आ वाराणभृताङ्गीतः शतमष्टादशोत्तरम् । त्रिपञ्चैकादश ज्ञेयाः पञ्च चरवार एव ते ॥११॥
वीरस्य गणिनां वर्षाण्यायुानवतिश्चतुः । विंशतिः सप्ततिश्च स्यादशोतिः फतमेव च ॥४८२॥ धारियोंका काल कहा गया है। महावीर स्वामीके केवलियोंकी संख्या तीन', चौदह पूर्वके धारियोंकी संख्या पाँच, दश पूर्वधारियोंकी संख्या ग्यारह , ग्यारह अंगके धारियोंकी संख्या पाँच और आचारांगके पाठियोंको संख्या चार है ।। ४७९-४८१ ॥ महावीर भगवान्के गणधरोंकी आयु १. गोतमस्वामी', सुधर्माचार्य', जम्बूस्वामी ये तीन केवली हुए। २. नन्दो', नन्दिमित्र, अपराजित, गोवर्द्धन और भद्र बाहु ये पांच चौदह पूर्वके धारी हुए। ३. विशाख, प्रोष्ठिल, क्षत्रिय, जय, नाग, सिद्धार्थ, धृतिषेण, विजय, बुद्धिल, वंगदेव और सुधर्म ये ग्यारह दश पूर्वधारी हुए। ४. नक्षत्र , जयपाल, पाण्डु, ध्रुवसेन और कंस ये पांच ग्यारह अंगके धारी हुए। ५. सुभद्र, यशोभद्र, यशोबाहु और लोहार्य ये चार आचारांगके धारी हुए। ६. यहां तिलोयपण्णत्ति अधिकार ४, गाथा १४७६ से १४९२ तकका प्रकरण विशेष ज्ञानके लिए द्रष्टव्य है
जादो सिद्धो वीरो तहिवसे गोदमो परमणाणी । जादो तस्सि सिद्ध सुधम्मसामी तदो जादो ॥ १४७६ ॥ तम्मि कदकम्मणासे जंबू सामित्ति केवली जादो । तत्थ वि सिद्धिपवण्णे केवलिषो णत्थि अणबद्धा ॥ १४७७ ॥ वासट्ठीवासाणि गोदम पहदीण णाणवंताणं । धम्मपयट्टण काले परिमाणं पिंडरूवेणं ।। १४७८ ।। कुंडल गिरिम्मि चरिमो केवलणाणीसु सिरिधरो सिद्धो। चारण रिसीसु चरिमो सुपासचंदाभिधाणो य ।। १४७९ ।। पण्ण समणेसु चरिमो वइरजसो णाम ओहिणाणिसुं। चरिमो सिरिणामो सुद विणय सुसीलादिसंपण्णो ॥ १४८० ।। मउड घरेसुं चरिमो जिणदिक्खं धरदि चंदगुत्तो य । तत्तो मउडधरा दुप्पव्वज्ज व गेण्हत्ति ।। १४८१ ।। णंदो य शंदिमित्तो विदिओ अवराजिदो तइज्जो य । गोवद्धणो चउत्थो पंचमओ भद्दवाहुत्ति ॥ १४८२ ॥ पंच इमे पुरिसवरा चउदसपुवी जगम्मि विक्खादा। ते वारस अंगधरा तित्थे सिरि वड्ढमाणस्स ।। १४८३ ॥ पंचाण मेलिदाणं कालपमाणं हवेदि वाससदं । वीदम्मि य पंचमए भरहे सुदकेवली णत्थि ।। १४८४।। पढमो विसाहणामो पुटिल्लो खत्तियो जओ णागो । सिद्धत्थो धिदिसेणो विजओ बुद्धिल्लगंगदेवा य ।। १४८५ :। एक्करसो य सुधम्मो दशपुव्वधरा इमे सुविक्खाण । पारंपरिओवगदो तेसीदि सदं च ताण वासाणि ॥ १४८६ ॥ सन्वेसु वि कालवसा तेसु अदीदेसु भरह खेत्तम्मि । वियसंत भव्वकमला ण संति दसपुस्विदिवसयरा ॥ १४८७ ॥ णक्खत्तो जयपालो पंडुयधुवसेण कंस आइरिया । एक्कारसंगधारी पंच इमे वीर तित्थम्मि ॥ १४८८ ।।
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