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________________ धातुरूपम् उष्यजति उप्पलते उपनिहिति उप्पुत उब्भिण्ण उम्मजित उम्मजितूण उम्मत्थित उम्महित उम्मुक लंधित उहित उल्लालित उलोइत लोकत उठोकेति उलोगित लो उहोबित उलोहित उनक उनकसित उस्खलित उवगूढ उवडिय उवणामेति वामैत जयणिमित उवत्त उदित उबहुत उवधारण उवधारये उवपेक्खित बफरिसते ये उवलदुग्व वसित उववित्त उस उपसमि Jain Education International पत्रम् २४६ उवसक्कित ८३ उचादिष्ण ८४ उबेह ३७ उबेसंत २४५ उब्वट्टण १११-१४८ उच्चरित उव्वलित २३९ १४८ उच्चलें १४८ १४८ १४८ १४८ १४८ १६८ १४५ - १४८ १४१ ३४-१७६ ४२ १९७ १०६ १४४ १९८ २५१ ८६ १९८ ८३ ३७ ३४ १२२ १४८ १५५ १०७ ७९-१०७ धातुरूपम् ३४ १०७ १९७ ९ १९३ १४५ उव्वात उब्वेलित उहासि उस्ससित उस्सारित उस्लासेंत उस्सित तृतीयं परिशिष्टम् चि उस्सिघित हस्थित एति एमि एहिति एहिती भोकट्ट ओकट्टित ओकडू ओकति ओकुर्णत ओखिन ओगूढ ओघट्टित ओखति ओछुद्ध श्रोणत ओणमंत ओणामित ओणिपीलित भोवरंति १५ १३५ ओतारिer १६ ओतारित ऊ ए ओ पत्रम् १८४ ओतिष्ण [२१० धाव १०४ भत १३५ ओमत्थित १९३ ओमथित ओमधिय १११ १०६ ओमुक्क ३८ ओमुंचमाण १२२ ओरिक १०८ ओरुज्झ १४८ ओरुमंत १४८ ओरूढ ११५ ओरेचित ३७ ओलकित १३२-१६८ ओलमित १९३ ओलंबित १४८-१८६ धातुरूपम् ओलोइत ओलोकित १७६ ओलोयंत ओलोलित १०७ ओवहित १०७ ओवत्त ७४-८४ ओवयित ८४ ओधारित ओबालिय १६ ओसरित १७१-१९५ ओसारित ८६ ओसुद्ध १६९ ओहत ४२ ओहसित १४८ For Private & Personal Use Only १९५ ओहिजंत ८६ ओहित ८३ १६९ कङ्क्षिति ३३-१७१ कत ३७- १३५ कधेति १४८ - २०० करिस्सति १४८ कस्सामो १ कंदित १६९ कंपंत १११ - १७१ कारयिस्सति क ૧૭ पत्रम् ३३-१७१ ८० ८०-१४४ २१५ १६९ १६२ १६२-१७१ ३८ १४८ ३९ ३३ १४८ - १८६ १४८ १४८ २३५ १४८ ३४ १६९-१८४ ४२ ८१-१६९ १६९ १६९ - १७१ २५८ १४८ १४८ १६९ - १९५ १४८ - २१५ १४८ - १९७ १४८ ८१-२१५ ८१ ३४ १४८ ८० ८१ * * * ८३ २३६ ४६-१६२ ३६ १७५ www.jainelibrary.org
SR No.001065
Book TitleAngavijja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyavijay, Vasudev S Agarwal, Dalsukh Malvania
PublisherPrakrit Granth Parishad
Publication Year1957
Total Pages487
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Jyotish, & agam_anykaalin
File Size15 MB
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