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अनुसन्थान ४३
लोकागच्छना श्रीपूज्योना त्रण भास
___सं. मुनिसुयशचन्द्र-सुजसचन्द्रविजयौ
बृहत् लोंकागच्छनी परम्परामां थयेल लखमसी (लिखमीचंद) ऋषिना शिष्य ऋषि गांगजीना काळधर्मनी घटनानो तिहासिक परिचय आपती प्रस्तुत कृति ऋषि शिवजीनी रचना छे.
आ रचनामां पूज्य ऋषिना सामान्य गुणोनुं निरूपण कर्या बाद पूज्यश्रीना काळधर्म वखते हाजर रहेला बगसरा श्रीसंघना श्रावकोमांथी थोडाकनां नामनो उल्लेख कर्यो छे. तेमनी अन्तिमयात्रामा सूरत वगेरे अनेक स्थळना संघो हाजर रह्यानो उल्लेख (कडी ७) नोंधनीय छे.
जाम अने जेठवा राजाओ तेमज झालावाडना राजवीओ तेमना प्रेमी होवानो उल्लेख (कडी ८) तिहासिक छे.
पोरबन्दरमा तेमणे १७६७मां चातुर्मास कर्यु हतुं, त्यारे तेमनी प्रेरणाथी दरियानी खाडीमा माछीमारीनो निषेध त्यांना राणाओ को हतो तेवो उल्लेख (कडी १२-१३) इतिहासनी दृष्टिले महत्त्वनो गणाय तेवो छे. तो ते ज प्रमाणे हालारना राजवी पासे पण तेमणे जीवदया, कार्य कराव्यु होवानो इशारो कडी-११मां प्राप्त थाय छे. आ उपरथी लोंकागच्छनो तथा गांगजी ऋषिनो प्रभाव राजा, प्रजा ओम उभय वर्गमां केटलो बधो हशे तेनो अंदाज मळे छे.
पोरबन्दरना राजवीने बरडापति तरीके ओळखावेल छे (कडी १३) ते पण ध्यानपात्र बाबत लागे छे.
गांगजी ऋषिनो स्वर्गवास बगसरामां थयेलो ते तो आ भास द्वारा स्पष्ट छे, पण तेनी तिथि तथा संवतनो उल्लेख आखी रचनामां क्यांय थयो नथी. १६मी कडीमां सं. १७७६ ने भा. सु. ५ ने भृगुवारनो उल्लेख छे, ते तो आ भासनी रचनानी तिथि होवानुं जणाय छे. हा, ओ ज दहाडे ऋषिनो काळधर्म थयो होय ने रचना पण ते ज दहाडे थई होय तो बनवा जोग जरूर छे, पण ते विशे चोक्कस कहेतुं शक्य नथी.
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भासमां आवती वार्जित्र वाजे... आ पंक्तिमां (कडी ७) ते वखते थतो लोकव्यवहार देखाडे छे.
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कर्तानो तेज कर्तानी अन्य कोई कृतिनो उल्लेख मळतो नथी, परन्तु कर्ताना अने गांगजी ऋषि- लखमसी ऋषिना गुणोनो उल्लेख, कर्तान्ना प्रप्रशिष्य ऋषि माहावजीओ पोते लखेल कयवन्ना रासनी पुष्पिकामां करेल छे, ते पुष्पिका अत्रे नोंधुं छं :
संवत १८६१ वर्षे शाके १७२६ प्रवर्तमाने श्री फाल्गुन मासे कृष्ण पक्षे २ द्वितीया तिथौ मार्तण्डवासरे श्री वेरावल बंदरे श्री बृहल्लोकागच्छे सकल कोविदकलासाम्राजान् पूज्योत्तमपूज्यश्री ऋषि श्री ५ लखमसीजीजी तच्छिष्य सौभाग्यातिशयसूचिमूर्तिर्भूरिचतुर्दशविद्यालङ्कृतगात्रगुणयुक्त पूज्यश्री ऋषि श्री ५ गांगजी तत्शिष्य समस्तशास्त्राभ्यासेन धीरोदारगाम्भीर्यप्रकृतित्वाद् रूपसंपत्सुशोभितः पूज्यश्री ऋषिश्री ५ शिवजीजी तत्शिष्य सम्यक समतारसगुणोपेतान् साहित्यतर्कलक्षणज्योतिष्कागमछन्दालङ्कारगात्र इत्याद्यनेक-गुणयुक्त पूज्यजी ऋषिश्री ५ जगसीजी तत्शिष्य विद्यमान अनेकागम विचारस्तरतत्त्वबोधकान्यत्षट्त्रिंशद्रागग्रामगुणोपेतान् श्रीमद्गुरो दीक्षाशिक्षादिदायकान् पूज्योत्तम पूज्य श्री ऋषि श्री ५ खीमजीजी तत्शिष्य लिखी० ऋषि माहावजी स्वात्मार्थे ।
( २ )
श्री महानन्दऋषिकृत श्री जगजीवनऋषिभास
१
बन्ने भास विज्ञप्तिरूपे रचायेल छे. लोंकागच्छना श्री पूज्य जगजीवन ऋषिने पालनपुर पधारवानी विनंतीनुं वर्णन प्रथम भासमां छे. आमां जगजीवन ऋषि ओसवाळ वंशीय छे, जोईताराम तथा रतनादेवी तेमना माता-पिता छे तथा श्री जगरूपऋषि तेमना गुरु छे, तेवी दस्तावेजी विगतो प्राप्य छे. जन्मस्थान के वतन अंगे कोई निर्देश नथी.
पालनपुरना विविध श्रावक कुटुम्बोनो परिचय तेनां गोत्रोनां नामथी आमां मळे छे ते नोंधपात्र बाबत छे.
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भासकार ऋषि महानन्द पोते भीम ऋषिना शिष्य छे तथा पोते पालनपुर चोमासु रह्या हता त्यारे त्यांना संघना कहेवाथी आ विज्ञप्ति भासनी तेमणे रचना करी होवार्नु कडी १४ मां नोध्यु छे.
बीजो भास पण लगभग आवी ज विगतो आपे छे. ते मास दीव बन्दरना संघनी विज्ञप्तिरूप भास छे. अमां विशेषता ऐ छे के दीवना वीशा तथा दशा श्रीमाळी, सोरठीया, पोरवाड, ओसवाळ, मोढ - एम दरेक ज्ञातिना संधोए एकठा मळीने विनंती पाठवी छे, सौने गच्छनायक पधारे तेवी आशा छे. कडी ६ मां श्रीरूपऋषि तथा जीव ऋषि ए बे पूर्व गुरुजनोनो उल्लेख छे. बाकी बधुं लगभग प्रथम भास जेवू ज छे.
महानन्द ऋषि लोंकागच्छना एक समर्थ कवि छे. तेमनी अन्य, पंचमी स्वाध्याय-आठम स्वाध्याय-नवपद स्वाध्याय-आत्मप्रबोध स्वाध्याय आदि १०-१२ गुजराती कृतिओ प्राप्त थाय छे. कृतिओ परथी रचनाकाळ १९मी शताब्दीना मध्यकाळमां (१८४० आसपास) होई शके खरो, पण ते माटे बीजी कृतिओ जोवी पडे.
प्रत शुद्ध छे. भावनगर-जैन धर्म प्रसारक सभानी हस्तप्रतोनुं सूचिपत्र करतां प्रस्तुत प्रतिवें संशोधन करी प्रगट करी छे.
शिवजी मुनि-कृत
गांगजी ऋषि भास अथ देशी - रतनगुरुनी गुणवंता गुरु गांगजी रे, तमे तरत कीयो परीयाण, माया मेली छे कारिमी रे, तमे चाल्या चतुर सुजांण
गुणवंता गुरु गांगजी रे ...१ गेंवरनी परें गाजता रे, तुझ देश-प्रदेशें नाम. मोटा राजेसर मानता रे, नित समरे तुम नाम, गुण ...
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बहु धरमी धन्य बगसरूं रे, जिहां संघ सहु सुखकंद, दोसी खीमासुत सोभता रे, कहुं केसवजी कुलचंद, गुण ... धर्मधुरंधर मोदी मेघजी रे, वली बुद्धि भली रणछोड, हेम समोवडि दीपे हेमसी रे, सधराज पुरे मन कोडि, संघ मांहि सोभागी जांणीयें रे, भला डुंगर ने मोरारि, पीतांबर मालव जागजी रे, वली प्रेमो जसाणी सार, गुण सुखकारण जीवो संघवी रे, धरे पूंजो श्रीजिन ध्यांन, व्यापारी वीचंद जांणीयें रे, बहुं मेलजी क्रमसी मांन गुण इम संघ सहु मिल्या सांमटा रे, जांणे सूरति केरो संघ, वाजित्र वाजे गुलाल ऊडे घणा रे, एक सुरपद पाम्या गंग गुण... ७ जांम नें जेठवो जाणता रे, वली झालावाडें राजि
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गुण
कहुं नरपति वली केटला रे, ते माने तुम लाज, गुण संघ सहु तुम चाहता रे, वली अवर कहुं अणपार, सास्त्र कही तसुं रीझवे रे, ताहरी वांणीना बलिहार, गुण तेज झलांमल भालनो रे, तोरी कुंकुमवरणी काय, चऊद विद्यागुण सागरु रे, एहवो नर पेदा नही थाय, गुण हालारनो पति रीझीयो रे, कहे ल्यो मनवंछित दांम, गंग कहे नही लीडं राजीया रे, माहरे जीवदयासुं काम, सतरसडसठ्यो सोहामणो रे, रह्यो पोरबिंदर चोमास, रांणो रीझ्यो गुण देखिने रे, कहे पूरुं तुमारी आसि, गुण सुणि बरडापति राजीया रे, हूं मागं वचन मयाल, लेख लखी आपो मुझनें रे, कोई खाडी न नाखे जालि, गुण राणो कहे धन धन तुं रषी रे, तुझ सम अवर न कोय,
गुण
धर्मपsो वजडाव्यो सहेरमां रे, जेम जीव न मारे कोय, गुण एम धन धरमनो बांधीयो रे, वली जे जे थयो जस वास, गुणरतनें भर्या गांगजी रे, तुमें पांमज्यो शिवपुर वास, गुण सतरछतेरे श्रावण ऊजली रे, पांचिमनें भृगुवार, बगसर सहेर सोहांमणो रे, जिहां संघ सहु सुखकार, गुण
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गुरु लिखमीचंद गाजता रे, तसु सेवक गंग सुजांण, गुण गाया गुरुदेवना रे, मुनि शिवजी कहे शुभवांणि, गुण ...
॥ इति गुरुदेवनी भास सम्पूर्णम् ॥
महानन्दमुनिकृत
जगजीवन ऋषि - विज्ञप्ति भास
आघा आम पधारो पूज्य० ए देसी (शी) सरसति सांमणि पहलां प्रणमी, श्रीगुरुपद सिरनांमी संघ सकलनी सानिध सेती, गावं श्री गणस्वामी
वहला पूज्य पधारो राजि श्री संघ अरज करें छें रे पंथी ! तू जाज्ये पेंहलो, भावनगर परचारी, जिहां गछनायक गिरुआ विचरे, श्री जगजीवन जयकारी चोरासी गछचंद बीराजें, गछनायक गुणें गाजें, श्रीजगरूप तणें पट छाजें, काम अरिदल भाजें जोईता नंदन जय जगवंदन, ओसवंश अवतारी, रतनादे उररत्व कहायो, इल माहें उपगारी पंच सूमते सूमता स्वांमी, गुपति गुपित विहारी, वाडि वीसूघे ब्रह्मचर्य पालें, कोध कसाय नीवारी आगम अंगोपांगें आखें, उपसमरसनी वांगी, दया धर्मनी देशन दाखें, अधीक भाव मन आंणी धन्य नगर-पुर सुंदर सोहें, धन्य धरा धनवंती, धन्य मानव जे नित्य प्रति वंदें चरणकमल मनखंती तुम गुंण कुसुम तणा परिमलथी, मन भमरा अति मोह्या दरसणनी उतकंठा जागी, करम सकल खल खोया श्रीपालणपुर संघ शिरोमणी, विनय ववेक विचारी, दांन दया गुंण - व्रतना धारक, साधू सकल हितकारी
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मेंहता वैद वडा वखताला, भणसाली भूपाला, लूंणीया मेंहता लायक कहीये, चतुर चौधरी चावा ... १० पारसनें प्रभू प्रांणथी प्यारा, आतमाना आधारा, कोठारी करजोडी वंदे,दीयो दरसण बलिहारा श्राविका सकल गुणें संयुत्ता, सीलवती सतधारी, प्रभू वंद्यानो प्रेम धरों छे, दीयो दरीसण दलधारी चरणकमल वांदी श्रीजीना, जनम कृतारथ कीजें, मानवभवनो लाहो लीजें, कारज सघलां सीझे श्रीगुरु भीम तणा पदसेवी, स्थवर(वि) सूजाण सुग्यांनी, पालनपुर मे रह्या चूंमासे., दया-धर्मना दांनी ... १४ संघ सकलनी वीनती मांनि, भास रची मनरंगे, मुनि मोटा शिष्य महानंद जंपें, उलटधरी नीज अंगे ... १५
महानन्द मुनि कृत जगजीवन ऋषि-विज्ञप्ति भास - २ ॥ थांने गहूली छ जी ए देशी ॥ . सरसति सामणि विनवू, माहरा सदगुरुजी,
लूली लूली लागुं पाय, सदा गुरु वंदोजी, गुण गावं गछराजना, माहरा सदगुरुजी, संघ सकल सुखदाय, सदा गुरु वंदोजी पांच इंद्री संवर करी, माहरा सदगुरुजी, नवविधि ब्रह्मचर्य धार, सदा गुरु वंदोजी, पंच सुमति सुमता करी, माहरा सदगुरुजी, पंच महाव्रतधार सदा गुरु वंदोजी । च्यार कषाय परिहरी, माहरा सदगुरुजी, पाले पंच आचार, सदा गुरु वंदोजी,
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गुपति आराधइ गुणनीलो, माहरा सदगुरुजी, गुण छत्रीसे धार सदा गुरु वंदोजी गच्छ चोराशी चंदलो, माहरा सदगुरुजी, श्री जगजीवन गुरुराय, सदा गुरु वंदोजी, पटधारी जगरूपना, माहरा सदगुरुजी, प्रणम्या पातिक जाय, सदा गुरु वंदोजी साह जोईता कुल जग जयो माहरा सदगुरुजी, दीपें तेज दिनंद, सदा गुरु वंदोजी,
रतनादे उर उपना, माहरा सदगुरुजी,
भेटें भवि चरणवृंद (चरण भविवृंद) सदा गुरु वंदोजी ... ५ श्रीरूपऋषि जीवऋषि तणें, माहरा सदगुरुजी, पाट उद्योतककार, सदा गुरु वंदोजी, शिवपुर मारग साधवा, माहरा सदगुरुजी, इल मांहे अवतार, सदा गुरु वंदोजी पीहर पंचे भूतना, माहरा सदगुरुजी, षटकायना आधार, सदा गुरु वंदोजी, द्वादश अंगी सूत्रना, माहरा सदगुरुजी, आखें अरथ उदार, सदा गुरु वंदोजी इम अनेक गुण आगरु, माहरा सदगुरुजी, कहेंता न लहु पार, सदा गुरु वंदोजी, एहवा गुरुजिने वंदता, माहरा सदगुरुजी, पांमीजे भवपार, सदा गुरु वंदोजी दीवबिंदर संघ सूंदरु, माहरा सदगुरुजी, विनवै वारंवार, सदा गुरु वंदोजी, भाव धरी भवियण प्रते, माहरा सदगुरुजी, द्यो वेहेला दीदार, सदा गुरु वंदोजी श्रीमाली संघ सोभतो, माहरा सदगुरुजी, वीसा विस्व विख्यात, सदा गुरु वंदोजी,
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दसा दयागुणे दीपता, माहरा सदगुरुजी, आख्या अति अवदात, सदा गुरु वंदोजी सोरठीआ संघ सुखकरु, माहरा सदगुरुजी, श्री पोरवाड प्रधान, सदा गुरु वंदोजी, ओशवंशे स्वामि उपना, माहरा सदगुरुजी, ते तो गुणना निधान, सदा गुरु वंदोजी मोढ-वणिक मनरंगथी, माहरा सदगुरुजी, प्रणमै श्रीगुरु पाय, सदा गुरु वंदोजी, हेतकरी हितकारणी, माहरा सदगुरुजी, सेवा करे सुखदाय, सदा गुरु वंदो जी, विनयवती सहू श्राविका, माहरा सदगुरुजी, झूलर झाकझमाल, सदा गुरु वंदो जी, गिरुआ श्री गछराजना, माहरा सदगुरुजी, गावै गीत रसाल, सदा गुरु वंदोजी संघ सकलनी वीनती, माहरा सदगुरुजी, मांनों श्रीमूनिराय, सदा गुरु वंदोजी, तुम दरिसण सुख संपजे, माहरा सदगुरुजी, पातिक दूर पलाय, सदा गुरु वंदोजी विनती करीने वरणवी, माहरा सदगुरुजी, भावै गछपति भास, सदा गुरुवंदोजी, महानंद मुनीवर वीनवै, माहरा सदगुरुजी, पूरौ मननी आस, सदा गुरु वंदोजी
... १५
__C/o. अश्विन संघवी गोपीपुरा, कायस्थ महोल्ने,
सूरत-३९५००१
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________________ अनुसन्धान 43 57 कठिन शब्दोनो कोष गांगजी ऋषि भास: क. पं. 14 1 *** गेंवर रषी धर्मपडो शिवपुरवास गजवर ऋषि धर्म-पडह मोक्षमा वास 4 भास - 1 * 3 इल सूमते सूमता इला - धरती समितिथी समिता - युक्त (समिति पांच, जैन मुनिनी आचार मर्यादानो सूचक शब्द) वाड,(ब्रह्मचर्यपालननी नव वाड) देशना - प्रवचन (सारा) वखत वाळा (भाग्यशाली) वाडि rura . WM देशन वखताला m लूली लूली भास 2 लळी लळी गुप्ति (3 गुप्ति, जैन मुनिनो आचार) पीयर - पितृघर गुपति " पीहर