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________________ प्रश्र० मंतर | विधुरवस एाम । स्वमन्त्रयामन्त्रयविव घायल परिणाम तर जब म कल्लुएं। रायपुरिसर रिकयं सयामा गरहणि पिय जमिन्त्रजाले देविप्पी तिकार के रामदामलयजप्पू रस मर मंगा मममरक, लिकते विदकरां त्रिविवियावशवकरें चरण रिवियं णुगत तश्यं मदारोगा व्या। श्रीसुधर्मस्वामिक चादानं बाजे चागलिकदीमा नेत्री जयाश्रवद्वार |तस्पती दत्तादान|| कहतांदतन सादीन लेवी के दचनादरदह मरण लयक लुमता रक दतां परधन नवदरि वातकरी जे दह कहतांदाद विज्ञसंता पातघामरणाम रिव ननदर एक बापुडा दियने कूटीमर तिणिकार शिमर एात घाल यबीविना जीव मजीरा इंरमादूरखाका ईधन दर निशि कालिया एत लान का रा दवा दी नातलगीएकलुषकतामा टवं पातक करीनास एक हतांत्रा सनक पजावण होश जिम हातात दन वाघासन एव यदन्नादीना श्रवधारीणि ६५
SR No.650035
Book TitlePrashna Vyakarana Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages518
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_prashnavyakaran
File Size218 MB
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