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________________ श्रचवाच्च बधार्थनु पूर्वाधरण अ-चवतव्य, श्रवण चानुश अवकव्यसहातिभा गा कव्यपार कर बर 2 वागविश्राए पुण्य१प्रवाविप्रागुपुत्राय आनुपूर्वमिरा, अन्यवक म० संत्रथवा श्रा- बचाउ च ΟΣ (एक) (.) एक रवी व्याइंच २ महवाञ्अति गुउय-प्रसन बराय महयापुर्वी समथवा चावर्ड चनानुपूर्या (श्र-भरत ॥ [ श्रध्य भ वक्रम : धरण 2/ (धरण) व्यएक २ उययव नवयाइंच) ४१५ वाजून गारपुवीय अवस्य १ अ मुक्त पर धरणार गईकर्स. या भागाबरी खानु पूर्वी सोशा भागाकाराने कसे जोशी श्राग्रथवा एकत्र अभानुश वि स्वाति नागुपुत्रीयप्रचलन याच राणापुर्वी • अनानुशय वरण
SR No.650032
Book TitleAnuyogadwara Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
Author
PublisherSujalpur
Publication Year1851
Total Pages412
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size168 MB
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