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श्रचवाच्च बधार्थनु पूर्वाधरण अ-चवतव्य, श्रवण चानुश अवकव्यसहातिभा गा कव्यपार कर बर 2
वागविश्राए पुण्य१प्रवाविप्रागुपुत्राय आनुपूर्वमिरा, अन्यवक म० संत्रथवा श्रा- बचाउ
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(एक)
(.) एक रवी व्याइंच २ महवाञ्अति गुउय-प्रसन बराय महयापुर्वी समथवा चावर्ड चनानुपूर्या (श्र-भरत ॥ [ श्रध्य भ
वक्रम : धरण 2/
(धरण)
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उययव नवयाइंच) ४१५ वाजून गारपुवीय अवस्य १ अ मुक्त पर धरणार गईकर्स. या भागाबरी खानु पूर्वी सोशा भागाकाराने कसे जोशी श्राग्रथवा एकत्र अभानुश
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स्वाति नागुपुत्रीयप्रचलन याच राणापुर्वी
• अनानुशय वरण