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जीवन यत्रतप्रदेसियादिक सी. समयक ही तो समस्तू गु
भूतस्कंध
किन कसिएराध/साच वदुपरसियाई बांध जाव-प्रांतपऐमि एवं स्नातक तेह नाशकात मायेक नि कम वेधत सामा य एवंसा
सूत्र - सि एवं जीवरहीत आदि के सादिकादशितेन मायक
श्री. जाधमसी)
मसजीवना विससमोपरि नामा तसामा एक कही एउ
येते. जीवरहितएतल एरिवंश मश्रर्थक गोश्रनेकसंधते यशितास चातालय कणखाधमकित अनेदवियखाताच दारा हमने दक्तिशसचित अर्थतं ते अनेकद्रव्यदंतन वादिकजीवप्रद- श्री-जा धना / जीवप्रदेश सचीन उदरा मरहित उदरचरणादिक जीवप्रदेश मरित एबे मिश्र शारणतरम चक्कादास नामक व-अतिरिक्त स्-हन्मुखे एम-अर्थते- ते नो नो श्रगम की द- द्रव्य से- अर्थनं ते गर भवियन्त्रारि बरिति दराधासताना प्रागमउदबोध सन द
बंधकीय
गवियरगीसतंजाएग
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पशुचा सहज दु· विप्रादमिया) क सिएजी वाहि
बुध
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