SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 301
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ याधीनसंरमाती उसम संख्या असंमाना उसपरासी बरनाला गमणीबासरिर-ते-पूसध्यानाशहरतालाग बालगडतकनी -संध्यान उसपी अवसपणीय अपर काजबाध्या शरीराला बाहलयाएरंगसारवासारख्याहिंउसरिणि उसपिरमीहिंभूवहारंतिकालाखिनउ असंख्यातासोक तिहांज जमुनेले रनरलागिउ-एकरकानंती उत्सपिलीनातला संमायतेतलाउदा शरीरजी वहात ने हननकाल थाश्रीअपररीतांनंता उ उपर। लाउदाउसरीरमाराग) अमारवधाासागातचनातमाछत्रयातेत्रणवत्रणताहि उत्तयिणीहि उसणिणी अश्रपरतोननंतीउसरपि खरखत्रयीमूरागस गीश्रवसपिणीश्वरीपतरशतसनेनालाजिना रीक्षावाला भयजीवश्कीन KITE-Enemanाशनन, धीमानबहेब विहारतकालावडेशनालोगोभयसिमीपहिरनगणसिदाशय रक के तमामहेभागवान पनि चीक्रियाशीर) प परप्पा गो गो प्रकार पापस्या न-तक । A यंतभागाबाकवश्यानांतरिउशियसरिएपोन्लत्तागायमारविहान्नसान भाग ब गतिमा SERVEERahgalisEDhle
SR No.650032
Book TitleAnuyogadwara Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
Author
PublisherSujalpur
Publication Year1851
Total Pages412
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size168 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy