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________________ ॥८॥ आयातित न स सारेच एउच उचइ जि जीनन उपस्पर अर्थ भा भावे करीतानि (या आवश्यक रानचत्र मित्रा यह 13 चव आदत एएं सारेर समुह एवं जिले भाग्वां प्रायस्य कृ-प्रफुलि -दसते मीका सि·सोखास न. तिवारइनथी जनिमाका कोक -एमधुन उकु विकसित (दिंद्रयांत६) व्यसनामाकम सहार स विशेष ति पयासकाल सिकिस्स नाव सिख जहााकादितो कोमल कमस छडभोस्य रमबोल राधीननु कुं· घडल. हो स्पइइम बोलर (एष-तेतं होस्पइभ जागा होस सरि सत थामृगलोचन उद्याचरविक सरक इउलि महा राना यं महे कुंभि भविस्सर अध्य कुंभ नवीस सितं भविय सागर द द- नाव - अर्थ होव जा. जाण नोसरीर जाएगाहोरनो बार नवराति इन्द्रयग्राकरपककर सरीर एबेधकी हो नाते जागसीय ए नि-त्रिएप्रकार पक करीए कि कोण एरोरनोसरी सरीरव्यतिरिक) उस्सय सिकि ते जाएग सरिर भवियसरीरखतिनं दवा वस्मयं र ॥ ८॥
SR No.650032
Book TitleAnuyogadwara Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
Author
PublisherSujalpur
Publication Year1851
Total Pages412
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size168 MB
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