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________________ तामियात्रा घिदियति रिकाना णि या एगसंतिक व हितानुभवच्छति । किन्नराक्षितावति। नाबाददे। तिति १३ दावावितिरिकाना लिए शिताशिमास दिता विशदावक्षिता विवद्यति ॥ जादिमारादिक्षता विवद वहां ति किरया लाडवाचारशे दिशता जाव दसत्रमा पुट विगर 50 हिता यति गारसा पुरविणार ७० दिताविया वयादत्रादिता विद्यच्यतइतिरि काड शिए दिवाच वद्यति किए गिदिए दिता उमापसिंदिप तिalt दवाव ।। विदिय दिता विनववद्यद्यगिड दिएकी दिए हिं वाद्येति किंपुट विकाइ दिताति एव कहाढविकाइया वचाउन खिताव पात सिं पिला गियाा। एएवंरादाव दिताज सदस्सार काणaaमणिया दावादिता विद्यति ॥ खाय काणादगावमा लियादाव दिताजा वडा मुदिता विषय नाम राशी सात काळा दिवा ववद्येति किनिर दशवादिता नवव।। तिमा पर इदिता निरवद्यति।जावादादिनि दिए २५० क्षिताव ढांति कराएगा विशारा शिता जाव कि श्रादसत्रमा खदविण २३ ॥ दिताम्रवद्यति।गारापतापुष्ट विरइए (दाता)) International Private & Polonial ary.org.
SR No.650030
Book TitlePannavana Sutra
Original Sutra AuthorShyamacharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages558
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_pragyapana
File Size250 MB
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