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________________ रहवाद्यमेगे दो देशविदेशको साइतान सुलतान दोरे वानाक विधादि नं सागताविभावावाकानी २४ यागनिमांनी सा. मेहइतिलमात्र दो लिई कासा पाऊ यावदी १ नयचरित्र दीनमा सामादेते के मना कार होते सादमु सा काराकसासूव‍ साबिनाको मिलिगारेही रे बालो टपल बासनी सा हा वारमतीववच नईकोस्पेओओर कवीकर करवायी करिनदयकोचावाचेदकनेर सक्दिनदिमा तश्यायाश्नर सीवान नाइने मुखोटा कहितासिद मीनावदिचिणा चरिको मतिमंद नाम विश्राम मनी शक्ति कसरे केम सु कामुकथकी नास्योउबल प्रादु की मी बायमी शोनईचा रूट देनानगर से मारनम् मेय्याश लेखेका किमान मुकीसनदी इसकि दो देवर वारसादेिव बातीयरिबेवीची घोसलयनृपवंद कारगुणावली करिक शिवरमेद हाल कारावासी नादावाडीया ऐदेशी प्रेमचा सुनने होकर नकरोबा ईडरोस मोरीतीली माझीडन दमस्या बस्पार एवहुमने दो कर खुकिमघटे नदीमुक मदोस (मो०डा चविचलरायो होमा दरो जीउ वित्त सुभासेो दागमा तोडे मे मुं को दो बाईएदने क बुयावलेला मोर 25 गोददिवा होना ईझी सानो एक की माफी मातामनदीजन ibrary.org
SR No.650028
Book TitleChandraras Patra
Original Sutra AuthorMohanvijay
AuthorKesharvijay
PublisherYakruli
Publication Year1760
Total Pages208
LanguageMarugurjar
ClassificationManuscript
File Size97 MB
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