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________________ मुखनिरष रविवारी कायनात शशा स्वयदारसानी म हद पर निवृत्ति जो ईलिविमल गऊपरियोडा व्यायारी रा विसुतावमा शमुख तर दलीलनव श्रीवारा देशविदेशवित्सराओ ब्रह्मादिकमल - एडवेलेकियाला कोमरा मरना व्यवहारीया या सहस योमाजी व्यायारी करवात तालसँग राततची सहकलाड़ी २५ नवयो तिकरतान विबी परदेशीयोम्यासवेन दीवीला खास मोहनदि में एक दासी मनदरमें चंदनरिद राम दि कमुखदार दल होली २० हुदा व्यापारातली दुजिंविमलरीस १शानीया ॐरगति दोस्तगीस मला मे तास सकलअधिकार में यरिपालयन मांगे |शविस्तार र सिकेदेनासिंहलपुरी कविता राज्य करत्यांकन कर गुरव सुधारक कहने कोमरूपसा विचार विधिना इशारय। नदिनिर्मम्योशेशार कोईकन नीतिघी र हिरामहिं लमदरसा मोती की ती जई ओर पपरवा एहमाचरिषेण हर मकरयाल की मदेशीतली प्रविवेशी स वनीवलेस मीली विशाल 9 ढाल हरियामन org
SR No.650028
Book TitleChandraras Patra
Original Sutra AuthorMohanvijay
AuthorKesharvijay
PublisherYakruli
Publication Year1760
Total Pages208
LanguageMarugurjar
ClassificationManuscript
File Size97 MB
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