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________________ वंदरास कोलावतीलधेरे एंबीसारखी सट तलकालये श्रीमानासनामोहरे मूंग की श्रम वा समाल २७ या दैवचन लीला दती रेरे बारा विमुकी वैरवसाव्या दासे बाहिरको लिला मुकाविरह किदांडीयाय २ केनरवसे सदास रखाबलोग 'यश्वेद ननविलदै इस्सद कंत वियोग र बोलिक्लिािनमेव्याला तोचमेस रजिनाशवं यतिवि दिन किमान ४ दोस्घाविवोदिया कोयता किम ह्रदयविदारी | झोटा ५ त्रविवकांतिर्नचरं नियटनिवुरनिरमोद को मुक धानालादया दो विगमयादी सदयतो देखता हरुरूप ढास योगी दे शीतक में वचन लाल कविलासवरसालारे वैकगिविरला काग्यविरो रमें यमुरखितवचननिमरमै रमाकै स ॥सासा नवनातिरखानमासार ३० जा लावती रुकमनी सामी दावी उपायत कीरि रविकिंमम स्वमामैं मैं तो क नविन मुकलोचा निश्म टोपी सामील १० मै मनावी मु इंतिदास्यो र के के दो अगसरे देश के हावेतो को मालामना विमोक्का ३०३ लादतावादमानय नवडक ३०४ मुरुघाल करवितानेदार राजा दिदा जान बल सनेही क 30 ७०.
SR No.650028
Book TitleChandraras Patra
Original Sutra AuthorMohanvijay
AuthorKesharvijay
PublisherYakruli
Publication Year1760
Total Pages208
LanguageMarugurjar
ClassificationManuscript
File Size97 MB
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