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________________ शिवि रहे थे| के देगी वेदरासय र १ देशेशनवसे तेदिशितलोयवाडेकर साकरी फरमान र श्रो कि दो तक होन रसकिदो रंगोनेद बोडी बाजीगरी घई गई कोई पात्र सुरगिरिसमजावणे anal स्त्रार मेलवे सारख्या दोन एमपादली विद्युविते तनुंगारे सम वि डर्बल ६ मीनिरंतरतय करें कर्मनिरिधिरेान निराजनुं डीलसागर नीरनईरे कोन गुदाल दया करों रेदयाल निवुन ऐदेशी नवलसन हीरेवेदनपाल बीपि यता गलीनारिमबल ग्रोकली ज्ञातयतितीरमसेरिचाल्या दललेई र गुलावली यदिनावारे लगवादस्तूर १० तेनटनेच्यावीमिणारे तायायस्वामी तारी सेवनारे मनकामनाली के दुलारे रहल में निशदी सात समरे बोलिवर एसीस ३०० रुकमै नामाकं सारे लकसेवक ||सनमान नटली दल व दैरे न० इकसमान ४० शिवमाला सिरकयरेरे राज ||श्मगमोदि चामरवाजे बरेच करे कोई वाहन मेरे नद विजयेनिमित्र कमरमा मनयदन सारे नृप प्रविशदाम मंजर घानने घरेट सबै शिवमालामे वा घटणारे ललेईरे नाजीवर मनि दोकान ६६ library ong
SR No.650028
Book TitleChandraras Patra
Original Sutra AuthorMohanvijay
AuthorKesharvijay
PublisherYakruli
Publication Year1760
Total Pages208
LanguageMarugurjar
ClassificationManuscript
File Size97 MB
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