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________________ चाननिष महालिया एविस्तीर्ण फुलीन डिगारसाला एकूटना का शिलानुम्रिमदति महालय सि० विस्तीर्ल फुल साहा सिसासन युवतिकन रिपरिवारिक संपरिवाड परिवारा सर्वत्र जाण प्रदीमा दिकालकरी शियायमा दीपक हयाणमाशिष्टि करा पाययनिरंतरान हण्नाटक गीय गीत नाटक नई विषजगावणं वाजवत्र तीला ताल की सीडियघातां बाजा वा त्रिघामधन गरिष्ट इंजि मानिनछन मृदंगा दरुषायजा तथा निज्ञादिकरारालाई गई मन्नु संबंधी या काम लागालात कविवर हवाई कोई एक कार्यक्रम समनामाज्ञादितांधक याए। ऋडागासाला मदत्तिम दालयसि सादा सांस महतो गावातील तालइडि लागला गाऊ मादिरागमवि त्रुतिसादवा मियां किं कारामा किंचाहा सदर्तितामा सिता मारियाचैवदति दावख लाड वयंशिस ग्राम विनवजीवति तामन पासिता श्रायरियां दे तितिर कामा जावारिपंचजणाच्याच शालायात तीन बालादप्रियाणस्वामीनका बाल किंकारामाकप करूँ कि आप किस्म पिएं। किं श्राविहारमात्रामा कस्क के कपल का दिया या नियंतिक किरा मुरवन सदतिस्वादेकारीलाई वारा वैद्य की निश्रा के सेनातिराजादिकनप्रति देवी को डाकरता प्रकाण मित्रादीन खान नामक दिवस मावशादवजीरुधाला कनरे । आजीविकाकारमपि राजान मित्रादीनारि याद तिवावकाश्मक स्वनिश्वयतिकर काम्मण हिंसादिकक्रियाति संपरिवाडास च जाणा शियाय मा घटुवा रारालाई पारसगा श्रावमा चित्रारिपचा शत्र रामा किंवा विद्यामा किया ग त्रयंशिसाद शिदवजीव
SR No.650027
Book TitleSuyagadanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorLalchand
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1645
Total Pages170
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_sutrakritang
File Size88 MB
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