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________________ परि 13. निदाद लोवदंति यन्मणिदापादणावाद निमानणाइजुद विकाश्या सात माह समकिरिया। हंगाम कर्मन दामा सम्मा मिच तिचणं ज्ञातः सम्मनित सिंघना रिकिश्या पातीचा लिया दिया मायावतिया श्रपचरका ए कि शिया व जात मिना दिन त सिगांव किरिया को तितार लिया जामिनासाथ त्रिया। एवंसमा मित्र दिही (प)सात होगा। नई गोल त्सावसमाउथ नाहसमा साकाहारश्याच विदाएँ साता|तं श्रावगईया समाज्या सामाचa|| गावश्या समाध्या दिसामावशगा। 5. आवाश्या विसमाजया सामाaaiगा 'शाश्यादिसमाया विस माववाग खर कुमाराणलात्।। सासमादारगासाव समसरीरा। जहा तरईया तहासाणियचा। नवकम बालसा२ि३ समर्थवाना पवे जावव पियऊभारा पुढे विकाईया श्रादा कमा लेम्माजदानरईया एंट विकाश्यालातसाव समावदा।। देता । समावद् ।। सारणाद्वलास मावदागा। पदविका श्यांस व असम किरिया । दंता समकिरिया से योद देविका श्या साइमाथा मित्र दिडताय तिया पं व किरिया उकिज्ञानि वृदिति लेते मानापोडनोट + लायाममित्र काहि पायविया ३० नि पंच क्रिया परंबा घा ईयागंजान साहा किमा
SR No.650016
Book TitleBhagavati Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1539
Total Pages1168
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size575 MB
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