SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 121
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ नवनयतापूर्वपबिम घोमान वन घोमानला देवतायघमा तेहघाउन संखान गुणा नवन्ध लामाट प्राय पारखानक मार |इते घाद बिर असंख्यात गुणवन बोलप मा25 ||१०||24||32|वालवितरि घोमाजे हा सोमिकाका 31 मासूत्र गादा दिए सारवद्ययादा दिल्लि दिता मलाढ विश्नर दिनाक पलाएपुढं पानरश्यावर मिमिनार प्रसारवद्ययादा दिए सारव ||दा दिल्लि दिवाएँ कम्पलापट शिनरश्यादा रम्यता एपटवा रइयापुर स्त्रिमय मित्रारणेयस वादा दिए सोरणादादि। गिल्लि दितावाडयालाइट विश्वरइएदिताश्या एस क्रूर लाएटवा नरश्यावर चिमए मिरर सेरवाद्य पादादिरस रएव घटाए||वा दाता सकर लाघवशिनरश्ए हिताश्मी/सरता टवानरइय चिमनारासारख घाणा दा दिएएए सारणा ब/दिसावा ते सोवापेावेदिय तिरिकाडा शियाएछ चिम एपुर गमविरसमादिया दा दिए। विरस सा दिया उत्तारणं दिससादिया)) दिसाणात सद्योदामस्मादा दिउरपर गमाव एमि ऐशिम सादिया । दिसाएशात सक्यो वालवावासी दिवार मिि एखादा दिए सारायणा) दिसावात एंस चोदा वाणमंत दवारा पैर मे ६१
SR No.650015
Book TitlePannavana Sutra
Original Sutra AuthorShyamacharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages596
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_pragyapana
File Size297 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy