SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 123
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ लोल हाम्यतयद्द मोर्येय दिकधाराचा बोल वर्जी ऋषीश्वर साधा खोल पावस्वानकवडी प्रज्ञावंत कुरुमीश्वर मावारदिन मन्त्रराधा गाय मायायाला लयवनत्रया। हामिसयामा दरिए विगहा सत्ताहवया या हायपरवा सावां मियंकाला लाला सिंपन्न व गाव सगा ग्रहाथा शिला माज्या आहारादहिसिलागत घोका विसरता घाबोल प्रज्ञावंत माधुग्राहा नई विषमपधशिय्या विषजले झुंलो गिदि। पत्रिऊवा लिन विकारिताला निभावतां विशुद्ध दोपटाला वर दिनाहारखप मिय्या साधुपहिले लिंगाव २६मदोन२६वत्पातनादोष नहं बीजी ग्रहगमगाई २० दोष टाली जीजीयरि लोगेष गाई।पिंड मि जोई लीए लोग 21 पावरपात्र ए च्यारियणाश्रनुग निविामा हग | १| अमाप माविश्यासादिया साधु सामान्या मात्र पनि विशेषोपधितोउयगररागते बिऊंपक हावाहावग्गाहिये। लंड गंड विदेशी गिशिता निरक सागांयशिला गेमिनको विशमा हिजो रेशन रिश्मा धुक गणी विधि प्रयुजइंडीलिए । जयागाय मा धुलोच यूक३ निजोई मार्जिश निरंतर ईर्याममतिसहित जययिगरण लांड परागादिकविहि 6. घाताय पवार मंदिदी चिरकु साडिले तरकिलोचन ईजोईहजई मंकइ १४७॥ यती साधुवमीनति। लकी नीति 8 दिना । मज्जयंडई। आग भिरिक विद्यावा5हन वीस मिएसच्या ।। १६४॥ उच्चारं या सभाएं । परवलं सिंघारा भानासिकानामनुमा श्राहारउप चिदिदा एमालाइत्यादिकण्डवख्या उच्चारादिकावा मिराविधानं । दिवसे दिना तदम् द्विषम् नत्र प्रणादा चोदाई मालाएं। याव सभी २५० थोडा को लोग તે વતાલી ન सामासार या विशि चिरकाल १५ डालिये। याहारंगव दिदि ह। श्रनंदा दिनहा दिदी र प्रमादाय में सालो बोलमा दिपहिलो बोलना च्यारिांगा २६ ना यात अनायतर आपात असं लोक रामसरलाय या वारा चर्वसाला ||२६|| श्रादायाला परदा 4छ Que. म श्री नथीद क नया ६२
SR No.650012
Book TitleUttaradhyayana Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorJaysundar
PublisherSanchor
Publication Year1682
Total Pages230
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_uttaradhyayan
File Size124 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy