________________
हिंगोलममा तमोटा समुद्रमा दिवा हि बेडी घाल बेडान इंविषई चारोहिये। ऊंच किमयारिजायसि। श्रगलम केसी प्रतिक दल सिमाहामानावा विपरिधावी इंसि गायम माडूाटा कहयारंग मिस्स सि राजाच्या साचिणीनाथा।
योगीतामा प्रदेसमार्थसहित) बेडी पायगामिनी। बेडी जलावशरहित कई बेडीपार के सागमप्रतिबो लाएं। उबेर मर
मरीरमा ऊनावि
निस्सा यार स्मगा मिली। जा निरस्याधिशीन वा माजपारस्त्रगामिण पशे नावायड को
कहीवडीवा कही संसारसमुद्रकही हूं। जेम दधिहिलामात्र संसार समुद्र ॥ गमता ही ज्ञानुदिन ऐनिमका
मदेसिया | | | माऊगा यमयन्नास्तायारत मे
शिवा बुचना विना संसारायन्नावाखाला अंतरेति रिघणावरणवद्योतकरसि।। । सर्वलो । रघाराचिविद्या शिक्षाका करिस्माद्यादये जीवलोकर श्रयदायक 1 मे सर्च । । जीवलोकभयो लागयतकाशासा करिश्मजेोयसाला मिया
कमाहिजी वरदशं ॥ ६६ ॥ ११ ॥ गौनमक हिक विनिर्मलसूर्य सर्व सद्यालागंमिप|ि|६ गजे विमालाला (सर्व प्रकरसि के सीगोतमद्यतिर बई। सूर्य कुणकदिने नेती खार
केसी बोलत
म
नाशकात्रा कमी गाथम मनवी
श्री मनसूपी सूर्य की संसार ऊंगिन। सर्व । लोकनईचिई नेपाली जीवन। तेन धर्मपी श्रलंकर मिस ॥ गोत्रमता हरीप्रज्ञा बुद्धि
קה
रवी सासन्न सिलरकारा] [साकरिस्माद्यायां सहाला गं मिया शि॥ ७२॥ सारगाथमयन्ना सूमीमाहरुसंग शरीर तणा 5: पियाजीवर मसलम निरुपद्रवा बाधारदिनकुचानक मांना गौतमका लोकत नया सारीर मा रमाएका बधमा गाया। एवमं सिदंगाबाद। वा किंमन्न सिमु दशचिराग
इथिविलागि