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________________ मिश्नपंध्रन्म प्रचित व्यवेध । अनेकप्रका पकव्या लेकेहचोकानोध हानी किनकिलरुष बंधन एनलचित्तवित थकोलाले रविसेबाहना सबसे कितअविधवधे२ अोगविहेषणता यखेघे गयखेधे किंनरबंधे बंध मोहनबंधगंधरवपण चतरविब धनबंध प्रथत सवित अथकोण अवितव्यबंध नोबंध बेध किरिस-धे मोहागबंधे बंधववाद सहबंधे सेत्तसचिसर्कित वित्तवर्क भनेकत्रकारप्रसप्पो नेकहले प्रहसाबंध । विप्रस्सीबंध जाचतवापा सप्रसी षेध २माविहेपण तिजदा हपएसीएबंधे तिपएसितखंधे जावटसपएसिएबंधे |संष्पातप्रमीधा अष्परतप्रसीवेध अनंतप्ररेसीषेधएसवयथतेअचित्तवेध अथकोलते चिन्नालवा संवेद्यपएसिएबंधे। अमेरवेजाएलएसीए अपएसीए-वैधे संतचित्तखेधो सेकिता मिषध मिलकप्रकारे धफप्पा कह सेनानो आगला | सेनानोवचलोषेध | मेनानो पालो मासयखंधे २ लाविहपन्नतेत मेणाअगामे विधेसे पाएमझिं मेबंधे सेणा अपने मियाअथवामथवाजागाजास अनेरासरीरना बनवियरथी ब्रताने एपछिवधे सर्तमीसेयरवारकधे महवीजाणीवनवियसरीश्वरस्ववधे पकच्या निदेशासमोटीवेध' सरधोजीच सवित्तनप्रचित्तम मिश्रकायब संचन अवितबंधायकोलते तिविपन्नतेतंजहा किसावध अकिसएखामाहोगवियर्सधै सेकिंत ब
SR No.650011
Book TitleAnuyoga Dwar Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
AuthorShivchandra Porwal
PublisherRatlam
Publication Year1853
Total Pages200
LanguagePrakrit, Marugurjar
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size101 MB
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