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________________ अनु यो २०६५ [] | सेवते | [सं०] । प्रधापलीयम से कोल पोषम ले प्रकार : वी पं० [सं० पज्योमे सुमहारीक तिहाजे से ल्पोपम समता सेते प्रधाप लिउनमे । सिकिंतंपलिज्मे तविहे पं० ते० (ऊमे वहारि एथ तच जेसे तलववहारीक सेते धाननापनी परियलि | जावतच्या करीयो । को हैन ही जे ते थायराव वा मल्योपम 成 हरिय ले बत प सुरुमे सेहव्ये तळलेजे सेवाव हारिए सेज हा नामए | पझसिया) जावलो मागमा जेल नस्स पालाको पत्योपते करस्यातेकरस्वासम एके की याका समय जेलेका थला निर्लेप हनामा का प्रदेस ते बालाने माका प्रदे पल [समा गाम पहे साले हिंवालयेहिं | कुन्नजनु समय लगने या तास पर संश्रवहाय थ 1 नागए बालीधार | सेवते । ते ते 1 २० महाक क्षेत्रपल्पोथ 1 व्यहारी कपल्यो - जावा काले सेप्लेजा व परिडिए) सेतं वाव हारिएखेत |चलिमे तिला को डि नाहसको कोकरी | ०ते एक [ व्यहारीक । तत्रसागरोधमनु । परिमा नहर | कोडिस विद्या रसगुलिया तं व्यवहारि खेतमसागरस्स सागराव मस्स एस्सभव परिमा निज मात्र मात्र तेववहारिक [ चल्यो [०अथ करिए जावलापन्नवाकार | सत्तेवावा हारिए | खेत जावतन थी कोल | तं० तेसुम क्षेत्र व ल्यो से किं तं सुक्रमे खे तथलि जायस एकेको वालाय ना से०जे मध्यान्ना पाला नीवरेयल्प हो एवाजाय दिण्जेच भाव तेहने असंष्यातमेना ताबें करी स्तुतिसुक्ष्म रही। मात्र प्रसेकर तालाना वमेसेज हा नामेए | पल्लेसियजावन्त्रसंविद्याई | खंडाकार | तेल वाले ग्राहिउगा हा EY
SR No.650011
Book TitleAnuyoga Dwar Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
AuthorShivchandra Porwal
PublisherRatlam
Publication Year1853
Total Pages200
LanguagePrakrit, Marugurjar
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size101 MB
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