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________________ उपास aru प लागो | पांच का रपंच व वस्त्र | प्रधानप हेरीन | कांमदेव | श्रावकत्रतः । या पंचवन्नावञ्चाई | पत्रपरिहिए का मंदे वं समोवास ध | | श्रावक । | बंधन्प) | हेदेवाप्रिया [ | पुण्पसहित) | जंकता कयल मदेसमणो वासयो|धले सिमं देवा पुंणिया स पुमेकाचे कयलक्षणे नलो लादो तें देदेवाएं प्रिया || मनुंष्पनो जन्म | जीवत्तव्य सफलकस्यो । जेमा टइं उम्हे नियंघप्रवचन सुल देणं । तव देवागुप्पिया | माणुसण्डम्म डी विफले) जस्म तवनिधेपा || पतानरूप ||प्रतिरूप || ]]लाहो||पामी ॥] सन्मुख | |इम) निश्व देदेवाएं वयो। इमे यारुवेपडिवत्री | लायापता / यत्तिसमरगा गया। एवं खजु देवाणुं प्रिया | |स केंद्र देवतानोराजा) | सतकर्ड) | सत्र सिंघास निविषई बरहो || चोरासी) ३(U प्पिया| सके देवं दे देवराया | सत्त कत्तु | जावसकंसिसी दासांसि च जरासि | एमबोल्यो || हे कांमदे एवं क्या सी दो कं
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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