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उपास २५
ते माटि आउँ | आणंद श्रावक न वेदा | ओने पास जानुं । इम चीतवानई। [ जिल्हा कणि राधा गला मिशा श्रादास मणो वासयामासामिव संपेहितिर ऊ ऐव [[हि] आणंद | श्रावकब || || जंहा | पौषध चाला | उपायान | इविष ||
को लाग | संन्निवेस गामबइ !
वेद समणो वास ए| जे वापस हसाला दश्रावकर। श्रागौत्तम स्वामि श्रावतादेखी नइ ॥]
तेणे वन वागच ततेां से समणो वा साग वा गोय मोजमापा हर्षपाम्पा | संतोषषाम्पा | सगवंत | श्री गौतमनइवादिश। ॥ इमकरुई | इमनिश्चय । |सतिराहा जाव हियाला गोयमेवेदति। न मे सति। एवे वयासा एवं ख | नगवान | ॐ || ऊदारिका । यावद्धमणिसर घघ । बोला नाहिला इनही हदेवा उ प्राय
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तु ते
मेरा ले आवधम सिंतिताए नो संचाए मि देवा।
| कोल्लाए सन्निवे से जो ति || श्री गौत्तम स्वामि आवश्]