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________________ आदर स्पर। किं चाना) एर्व स [वेत कहिइना | माहरु घणावरस | श्रावक नोमय नोते है| सम गोयमा आणंदेणं समणेो वा सग |बश्वासाइ समोवा नही आणंद, श्रावक । पालीनइ | अंतसमइ कालकरीन | |जावत | सौधर्म नामादे चलो महिल रुतविमानन विष दे सपरियागं पानी हितिर जावसो हम्मे कम्पेन ||देवता मणि कप जस्पई | तिहांक लि। एक देवता । तायांनव वजिहितितच गाणं देवाएं चत्रा रिप लिन व मांई हिंदी नितिशांक) आणंद'नामा देवतानुं । च्यारिपल्येोमम आयुबूं बिइ। तेयामस्य | | तिवारपा पन्नात दस्म विसमचित्ता पिलिनवमाहिती पंपत्ता | ततेांगावास श्रमण | रागवंत मावार) श्रन्पदाप्रस्तावि| बहिया जनपद देसमा हिविहारकरश | तिवारिली ध | समणे नगवामा हावा रे मादा कमाई बहिया जाव विहरति तातएं से स मस्स + रुणाविमाणे देव | च्यारिमल्यो पम ना स्थितिबइ | नूक्ति
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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