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________________ | स्थूल दत्ता दान मोलताना खाना। [ मो. घोटोनपदेस] क्रु'कूमा लेष लिषवा 4 | | तिवारपा | वातप्रगट कराव. चोरि सदार मंतए मोसो वसे डले हकरततरं धूल दि विरमण विषय | पांच मोटा ती चार जागाव]] | पलि समाचरवानही । तेकहि । । ३१ तचान इषरचना। नादास पंचाश्या राजाचा नस मारियच्द्या तेज हा । तेनाह । तकर ||विवराजानषेधुते।। ॐ कूमातोला कुलोमा त सबराव माहि निषरा तेल तिवारी | | व्यापार कर्वनर तथा दाणचोरि |प्लानकर वा ॥ वी नही जूना वस्तएकी करिनही | नगेो विरुध र जाति क्कमे | ऊड चले कडमाणे तप्पडि रुवगववहारे । तदा। तरंच स्वदार संतोषनामोच | तीचार | | जाणवा | | न· पणि सर्वीवेव समाचरवानही । श्वर घोमि। | तेक हिबि| कालिन्य। |सदार संतो सीए) पंच अतिया रा जाणियच्चान समाय रियच्चा तेज हो। इतरिप श्रापा पोताना करातो गव ॥ परिगृहीता विधवा । श्रकुचग्रहणादि। पारका वा चाहना जो रूप 'पबिका दाशर | कुमारिकावे शमा दिगमन | किचिष्टा करवा वामा करवा|४| गंधन स्पर रिग्रहियागमणे अपरिग्रहियाग मांग कीडा पर वावाह करणे कामतेो
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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