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________________ }] विचरइंबई] | तिवारप||ते | मादा सतक ] | श्रावकरें। घलुंसी लजलादिक । श्रापणे। वहारं विहरति तप से महासय समणो वासए बऊदिसी लजाव प्णा आत्मा सावतां || वीसवरस | सावित्रा वी संवा सायं | कनी प्रतिज्ञा | | सम्पम् प्रकार सगप डिमान सम्मका एफा से त्रा | मा सियाए संलेदार अप्पालंमित्ता साविनो । सल | | बेदानई । लोइपडिकर्मी सुदवई | समाधिन इंपांम्पा मरणानई। | सहिंसन्नाईसराई | बेदीता लो झ्यपडिकं समादिपत्ते कालमा अवसर पामी का सौधर्म देवलो करें | रुदितंसक || विमाननइंविषई अपनो|| यारफ्यो मन ||से कालं किच्चा सोमे कप्पेरुविडंस विमा लेडदव ने चत्तारिप लिनो श्रावकनी ) ( प्रतिज्ञा | पाली नई । । श्रगीयार ॥ | श्राव समो वा सगं परियाज गंपाउलित्ता | एक्च्चा रसाउदा काया शंकरी | मासदिननी | संलेषण करी नई | आप या त्माऊंसी फरसी नई नई रानई उपासग
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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