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________________ उपासग प६ नीसचो तेकाल | तेसमान इंविषई | | सामीसमासस्या ) | परिषदानी सरी) जिम | आद वांदवा | तिम) ते का लेणं तेणं समां सामीस मो सटे | परिसानि गया जहा गाणं दो त दानि महम्मत तिम श्रावक नो पडिवज्यो | | एत जोद्विशे या कोडिको स्पा सहित पूर्व चोवीस को कहे वांदवानी सरोज กรุงจริงๆ) |ग्रञ्छति तदेव सावयधम्मं पडिवनि एवरं चदिर को डीसकसाउ | उच्चा वीवर्य कहिवां रेवती ] प्रमुख। तेर सार्या उपरांति | | शेषघाकरं । सर्वमेकन्तुं | ま पचख शेष बल तिमजन्या इमंचणे - समच एतारूप अतिग्रह) एनी परिजांणवा इंचा क्या लं कारें रेति वया रेवपामो वाहिं तेरसहिंतारिया हिं। श्रवमे संमेऊ विहं) प [ईन] | दिन दिन || चरवाति से मंसवंत देव । इमं च एतारुवंतियद् यतिजिहति कहना कलिं प्रतरं कल्परं मुजन || बेोलकां सानु पत्र ) सोनश्या तरीन ] ] दिवसा यन चर्ण कप्पतिमब दो लिया ए कंस पाईए। दिरण सरियाए संविवद् रियाए संव लातोदिव GE
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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