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यह वचनसोल नयरहितविचरवा लागो || एमदेवता | बेवार ) त्रिलवार|श्मक हियं । यावत्।
इंधक
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समाणे सीए जाव विहरति । एवं देवो दो चंपि तचंपिस पति जाववि |जीव रहितवाइस | तिवारपी] ते | सुरादेव) | ममोपासक / | ते देवतानो) बेवारा त्रिल वरो विद्यसि तते तस्मासुरा देवस्म समगोवा-सयस्स | तेणं देवेणं दो चं पित वारपहर्तुंवच नसांस लेवक पवोतान अध्यवसाय ] ४ | आचर्य) 1) | पुरुष नार्य रुप उपनो पिएवं वुत्त्रे समाएस इमेयारू वे यशचिए४ | यो इमी से पुरिसे या (घको) पापसमाचरइंबई | जेामादोवडो पुत्र यावत लघुपुत्र न ईमारी नई शरीरपरडयो अन |रिए डाव समाचरंति जेणं ममं पुत्रं कणीय संजा वयाचति | जे दि हमलां ए| सोन || रोग | | ते देवत्ता वां बबई | मादा सरीरनईविषमं प्रषेपवा । तोश्रेय यहां इमे सोलस्म रोगाईका ते वेयणं इल्लति ममं सरीरं सिपखिविज्ञातं सेयं
जेवल
म. मशमपुत्र
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